AGM 2026: गौतम अडानी का बड़ा ऐलान, ₹1.5 लाख करोड़ के निवेश से भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और AI भविष्य को मिलेगी नई रफ्तार

AGM 2026: अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने वार्षिक आम बैठक (AGM) 2026 में कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 समूह के इतिहास का एक निर्णायक वर्ष रहा। वैश्विक चुनौतियों, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी बदलावों के बीच भी समूह ने भारत के विकास पर अपना विश्वास बनाए रखा और इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, डेटा सेंटर और औद्योगिक विनिर्माण में रिकॉर्ड निवेश किया। कुछ वर्ष किसी समूह के इतिहास में केवल उपलब्धियों के रूप में दर्ज नहीं होते, बल्कि वे उसकी पहचान बन जाते हैं। ऐसे वर्ष, जो विश्वास की शक्ति को प्रमाणित करते हैं, जो चुनौतियों के बीच दृढ़ता का परिचय देते हैं, और जो यह स्पष्ट करते हैं कि असली नेतृत्व उन लोगों का होता है जो अनिश्चितताओं के बीच भी निर्माण का साहस रखते हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 हमारे समूह के लिए ऐसा ही एक ऐतिहासिक और निर्णायक वर्ष रहा। यह वह समय था जब वैश्विक परिदृश्य और अधिक जटिल और विभाजित होता गया। ऊर्जा सुरक्षा फिर से राष्ट्रीय रणनीतियों के केंद्र में आ गई और प्रौद्योगिकी किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता का अभिन्न अंग बन गई। इन परिस्थितियों के बावजूद, आपका अडानी समूह एक अटल विश्वास के साथ आगे बढ़ता रहा—भारत का भविष्य किसी प्रतीक्षा का मोहताज नहीं हो सकता। जब अनेक लोग परिस्थितियों का विश्लेषण कर रहे थे, तब आपका समूह निर्माण में जुटा रहा। ऊर्जा, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में हमने दुनिया के सबसे एकीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी यात्रा को और अधिक सशक्त बनाया।

यह प्रगति आसान परिस्थितियों में नहीं हुई। यह अभूतपूर्व जांच-पड़ताल और चुनौतियों के बीच हासिल की गई। फिर भी हम न झुके, न रुके। क्योंकि हमारी पहचान कभी भी हमारे आसपास के शोर से नहीं बनी, बल्कि हमारे उत्तर की शक्ति से बनी है। हमारी पहचान चुनौतियों की तीव्रता से नहीं, बल्कि हमारे उद्देश्य की स्पष्टता से बनी है। हमारी पहचान आलोचनाओं से नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता से बनी है। इसी विश्वास का एक सशक्त उदाहरण इस वर्ष का हमारा ₹25,000 करोड़ का राइट्स इश्यू था। यह केवल पूंजी जुटाने की प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि हमारे प्रति आपके विश्वास और हमारी विश्वसनीयता की एक महत्वपूर्ण परीक्षा थी।

भारत के कॉरपोरेट इतिहास के सबसे बड़े राइट्स इश्यू में से एक इस पहल को जिस प्रकार आपका समर्थन मिला, उसने एक स्पष्ट संदेश दिया। जब कुछ लोगों ने संदेह पैदा करने का प्रयास किया, तब आपने विश्वास दिखाया। जब प्रश्न उठाए गए, तब आपने भागीदारी के माध्यम से उत्तर दिया। और आपने हमें वह जनादेश दिया, जिससे हम भारत के निर्माण की इस यात्रा को और अधिक गति दे सकें।

इसी राष्ट्र निर्माण की भावना को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष मेरे संबोधन का विषय है—
“इन्फ्रास्ट्रक्चर को गति देना, बुद्धिमत्ता की शक्ति का लाभ उठाना” (Accelerating Infrastructure, Leveraging Intelligence) यह केवल एक विषय नहीं, बल्कि आने वाले भारत के लिए हमारी रणनीति, हमारी दृष्टि और हमारी प्रतिबद्धता का घोष है।
आज इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटेलिजेंस दो अलग-अलग प्राथमिकताएँ नहीं रह गई हैं। ये वैश्विक विकास के वे दो शक्तिशाली इंजन हैं, जो भारत की ताकत को आकार देंगे, उसकी संप्रभुता को सुरक्षित करेंगे और उसे इस सदी की सबसे प्रभावशाली शक्तियों में शामिल करने की गति प्रदान करेंगे।

पहला इंजन है—इंफ्रास्ट्रक्चर।
सड़कें, बंदरगाह, हवाई अड्डे, ट्रांसमिशन लाइनें, विद्युत संयंत्र, नवीकरणीय ऊर्जा पार्क, गैस नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म, सीमेंट क्षमता, जल प्रबंधन प्रणालियाँ और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र—ये सभी वह आधारभूत संरचना हैं, जो किसी राष्ट्र की प्रगति को संभव बनाती हैं।

दूसरा इंजन है—इंटेलिजेंस।
डेटा सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऑटोमेशन, प्रेडिक्टिव सिस्टम, डिजिटल प्लेटफॉर्म, रियल-टाइम एनालिटिक्स और मशीन-आधारित निर्णय प्रणाली—ये वे साधन हैं जो प्रत्येक इंफ्रास्ट्रक्चर परिसंपत्ति को अधिक स्मार्ट, अधिक कुशल और अधिक उत्तरदायी बनाते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर किसी राष्ट्र को शक्ति देता है। इंटेलिजेंस उसे नेतृत्व प्रदान करती है। और आज के युग में दोनों एक-दूसरे से अविभाज्य हैं।

हम उन चुनिंदा वैश्विक कंपनियों में शामिल हैं जो भविष्य की प्रतीक्षा नहीं कर रहीं, बल्कि उसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। सच्चाई यह है कि हम वर्षों से इस परिवर्तन के लिए स्वयं को तैयार कर रहे थे। हमने बहुत पहले ही यह समझ लिया था कि दुनिया एक नए दौर में प्रवेश कर रही है—एक ऐसा दौर जहाँ भू-राजनीतिक चुनौतियाँ और गहरी होंगी, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ अधिक खंडित होंगी और ऊर्जा सुरक्षा फिर से रणनीतिक प्राथमिकता बन जाएगी। हमने यह भी पहचाना कि तकनीकी नेतृत्व और डिजिटल संप्रभुता की वैश्विक दौड़ केवल महत्वाकांक्षाओं से नहीं, बल्कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से जीती जाएगी। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमारी शक्ति केवल हमारी परिसंपत्तियों में नहीं, बल्कि उनके आपसी जुड़ाव में निहित है। खनन से लेकर बिजली उत्पादन तक, ट्रांसमिशन से लेकर वितरण तक, बंदरगाहों से लेकर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तक, डेटा सेंटरों से लेकर फुलफिलमेंट सेंटरों तक, और सड़कों से लेकर जल अवसंरचना तक—हमारे पास वह क्षमता है जो इंटेलिजेंस के इस नए युग को शक्ति देने के लिए आवश्यक हर महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर स्तर को एकीकृत रूप से जोड़ती है।

अब मैं कुछ ऐसे आँकड़ों का उल्लेख करना चाहता हूँ जो हमारे निर्माण के पैमाने को दर्शाते हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में हमने हार्ड इंफ्रास्ट्रक्चर में 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड पूंजी निवेश किया। इस उपलब्धि का वास्तविक महत्व तब समझ आता है जब हम देखते हैं कि यह निवेश भारत के कुल नए निजी क्षेत्रीय पूंजीगत व्यय (Private Sector Capex) का 30 प्रतिशत से अधिक था। हमारे लिए यह केवल एक वित्तीय आँकड़ा नहीं है। यह हमारे विश्वास की घोषणा है। यह भारत के भविष्य में हमारे अटूट भरोसे का प्रमाण है। और इससे बड़ा राष्ट्र-निर्माण का उदाहरण शायद ही कोई हो सकता है कि हम निरंतर उस इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रहे हैं जो भारत के अगले विकास अध्याय को ऊर्जा प्रदान करेगा। अब मैं पिछले वर्ष की कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियों की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस में हमारा ट्रांसमिशन ऑर्डर बुक बढ़कर 72,000 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। हमने कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ हासिल कीं, जिनमें खावड़ा-साउथ ओलपाड HVDC लाइन जैसी रणनीतिक परियोजना भी शामिल है। ये उपलब्धियाँ केवल व्यावसायिक सफलता नहीं हैं, बल्कि भारत के ऊर्जा भविष्य को अधिक सशक्त, विश्वसनीय और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हमारे निरंतर प्रयासों का प्रमाण हैं।

इस उपलब्धि ने हमें भारत की एकमात्र निजी क्षेत्र की कंपनी के रूप में और अधिक सशक्त बनाया है, जिसके पास हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) तकनीक को विकसित और संचालित करने की सिद्ध क्षमता है। अडानी पावर में हम भारत के इतिहास के सबसे बड़े निजी क्षेत्रीय बिजली निवेश कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे हैं। दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के इस निवेश के माध्यम से हमारा लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में 45 गीगावाट उत्पादन क्षमता तक पहुँचना है। हमें इस बात का भी गर्व है कि हम भूटान सरकार की ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन (DGPC) के साथ रणनीतिक साझेदारी कर रहे हैं। इस साझेदारी के अंतर्गत अडानी समूह और DGPC संयुक्त रूप से 5,000 मेगावाट क्षमता की जलविद्युत परियोजनाओं का विकास करेंगे। यह केवल एक व्यावसायिक पहल नहीं, बल्कि क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अडानी एटॉमिक एनर्जी के माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में हमारा प्रवेश भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक साहसिक और दूरदर्शी कदम है। आवश्यक भूमि की पहचान की जा चुकी है और वर्ष 2035 तक 10 गीगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे हम भारत की बढ़ती स्वच्छ, विश्वसनीय और 24×7 ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अग्रिम तैयारी कर रहे हैं। अडानी टोटल गैस ने भी उल्लेखनीय प्रगति की है। हमने 11 लाख से अधिक पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) घरेलू कनेक्शनों का महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा मांग को देखते हुए हम अपने PNG नेटवर्क का और अधिक विस्तार कर रहे हैं, ताकि देश के नागरिकों को सुलभ, किफायती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराई जा सके।

यदि हम कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स की बात करें, तो अडानी पोर्ट्स ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 50 करोड़ टन से अधिक कार्गो हैंडल कर एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया। यह उपलब्धि वर्ष 2030 तक 100 करोड़ टन कार्गो हैंडलिंग के हमारे लक्ष्य की दिशा में मजबूत आधार तैयार करती है।
हमारे बंदरगाहों, विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ), लॉजिस्टिक्स परिसंपत्तियों और तेजी से विस्तारित हो रही समुद्री सेवाओं का एकीकृत नेटवर्क भारत के व्यापार को अधिक प्रतिस्पर्धी, कुशल और कम लागत वाला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
मुझे विशेष रूप से यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि विझिंजम बंदरगाह, जो विश्व की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक पर स्थित है, ने अपने पहले ही वर्ष में 10 लाख TEUs का रिकॉर्ड पार कर लिया। यह उपलब्धि किसी भी भारतीय बंदरगाह द्वारा हासिल की गई सबसे तेज़ प्रगति है और वैश्विक ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका का सशक्त संकेत भी है।

हवाई अड्डा अवसंरचना के क्षेत्र में हमने दो ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कीं—नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तथा गुवाहाटी हवाई अड्डे का नया एकीकृत टर्मिनल भवन, जिनका उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया गया। इस वर्ष इन दोनों हवाई अड्डों को दुनिया के सात सबसे खूबसूरत हवाई अड्डों की सूची में शामिल किया गया। विशेष रूप से दिसंबर 2025 में नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का संचालन प्रारंभ होना भारत की विमानन यात्रा में एक गौरवपूर्ण क्षण था। 9 करोड़ वार्षिक यात्री क्षमता वाले इस विश्वस्तरीय हवाई अड्डे का निर्माण मात्र चार वर्षों से कुछ अधिक समय में पूरा किया गया, जो अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है।

डिजिटल और औद्योगिक अवसंरचना के क्षेत्र में हमारा डेटा सेंटर व्यवसाय वर्ष 2030 तक 3 गीगावाट क्षमता वाला प्लेटफॉर्म विकसित करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। विशाखापत्तनम में गीगावाट-स्तरीय डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए गूगल के साथ किया गया बाध्यकारी समझौता (Binding MoU) न केवल भारत में डिजिटल मांग के बढ़ते पैमाने को दर्शाता है, बल्कि यह भी प्रमाणित करता है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, उबर और फ्लिपकार्ट जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियाँ हमारी क्षमताओं पर कितना भरोसा करती हैं। खनन सेवाओं के क्षेत्र में चार नए MDO समझौतों के साथ हमारी कुल क्षमता बढ़कर 145 मिलियन टन प्रतिवर्ष के रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच गई है। इससे भारत की सबसे बड़ी निजी खनन कंपनी के रूप में हमारी स्थिति और मजबूत हुई है तथा देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।
अडानी सीमेंट ने देश की कई प्रतिष्ठित परियोजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिनमें चिनाब रेलवे ब्रिज, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और अहमदाबाद स्थित उमिया धाम परियोजना प्रमुख हैं। पिछले वर्ष हमारी कुल सीमेंट उत्पादन क्षमता बढ़कर 110 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) हो गई।

रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में भी हमारी महत्वाकांक्षाएँ नई ऊँचाइयों तक पहुँची हैं। लियोनार्डो और एम्ब्रेयर जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ हमारी साझेदारियाँ भारत में हेलीकॉप्टर और क्षेत्रीय विमान निर्माण के लिए एकीकृत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रही हैं। हम एक ऐसा राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म विकसित कर रहे हैं जो विनिर्माण, MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एवं ओवरहॉल), सेवाओं और पायलट प्रशिक्षण जैसे सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों को समाहित करता है। मुझे यह बताते हुए विशेष गर्व का अनुभव हो रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, मिसाइल और गोला-बारूद ने भारतीय सशस्त्र बलों की सहायता की। राष्ट्र की सुरक्षा के महत्वपूर्ण क्षणों में योगदान देना हमारे लिए केवल दायित्व नहीं, बल्कि सम्मान का विषय है।

अब यदि हम अपने वित्तीय प्रदर्शन पर दृष्टि डालें, तो वित्तीय वर्ष 2025-26 हमारे लिए अनुशासित विकास और उत्कृष्ट निष्पादन का एक और सफल वर्ष रहा। हमारे समेकित पोर्टफोलियो का राजस्व 2.92 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
हमारा EBITDA 94,834 करोड़ रुपये रहा, जबकि नेट डेट-टू-EBITDA अनुपात 3.3 गुना के स्वस्थ स्तर पर बना रहा। यह हमारे परिचालन व्यवसायों की मजबूती, स्थिरता और वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है। कर पश्चात लाभ (PAT) में 13.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 46,376 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। वहीं हमारा परिचालन नकदी प्रवाह 67,995 करोड़ रुपये रहा। ये ऐतिहासिक वित्तीय परिणाम हमें वह शक्ति, तरलता और आत्मविश्वास प्रदान करते हैं, जिनके बल पर हम भारत के बुनियादी ढाँचे के विभिन्न क्षेत्रों में अभूतपूर्व स्तर पर निवेश जारी रख सकते हैं। अब मैं उन तीन आधारभूत पहलों की चर्चा करना चाहता हूँ जो आने वाले दशक में हमारी दृष्टि को साकार करने वाली संस्था का निर्माण करेंगी।

पहला—सरलीकरण हम अपने कार्य करने के तरीके को अधिक सरल, तेज़ और प्रभावी बना रहे हैं।
मुख्यालय से लेकर परियोजना स्थलों तक हम एक नई त्रिस्तरीय संगठनात्मक संरचना लागू कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य अनावश्यक प्रक्रियाओं को कम करना, जवाबदेही को मजबूत करना और निर्णय लेने की प्रक्रिया को सीधे क्रियान्वयन के निकट लाना है।
हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—कम नौकरशाही, अधिक जवाबदेही। कम जटिलता, अधिक गति। कम विलंब, अधिक परिणाम। क्योंकि आने वाले दशक का नेतृत्व वही संगठन करेंगे जो सबसे तेज़ निर्णय लेंगे, सबसे बेहतर क्रियान्वयन करेंगे और सबसे अधिक मूल्य सृजित करेंगे।
हमारी नई कार्यप्रणाली का मूल सिद्धांत स्पष्ट है—संगठन का प्रत्येक स्तर मूल्य सृजित करे। जो गतिविधियाँ हमारे मुख्य व्यवसाय का हिस्सा नहीं हैं, उन्हें हम अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) अथवा विशेषज्ञ साझेदारों को सौंपेंगे, ताकि हमारा पूरा ध्यान उन क्षेत्रों पर केंद्रित रहे जहाँ हम सबसे अधिक प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं।

दूसरा—साझेदारी का नया मॉडल।
हम अपने ठेकेदारों को केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के दीर्घकालिक साझेदार के रूप में देखते हैं।
हम ऐसे मजबूत और स्थायी संबंध विकसित कर रहे हैं, जहाँ उनकी प्रगति सुनिश्चित हो, उनके हित सुरक्षित रहें, उनके लाभ की रक्षा हो और उनके लक्ष्य हमारे लक्ष्यों के साथ पूरी तरह जुड़े हों। जब साझेदारी विश्वास पर आधारित होती है, तब परियोजनाएँ केवल पूरी नहीं होतीं—वे उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करती हैं। इसी सोच के साथ हम अपने सभी प्रोजेक्ट्स को अधिक गति, बेहतर गुणवत्ता और गहरे स्वामित्व भाव के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।

तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण—मानव गरिमा को केंद्र में रखना।
हमारे परिवर्तन की सबसे महत्वपूर्ण नींव है—हर श्रमिक का सम्मान।
हमारी और हमारे ठेकेदारों की संयुक्त कार्यशक्ति लगभग 4 लाख लोगों की है, जिनमें से लगभग 85 प्रतिशत लोग सीधे परियोजना स्थलों पर कार्य करते हैं। यही वे लोग हैं जो हमारे विज़न को वास्तविकता में बदलते हैं। यही वे हाथ हैं जो योजनाओं को संरचनाओं में, और सपनों को उपलब्धियों में बदलते हैं।
इसलिए हमने संकल्प लिया है कि प्रत्येक श्रमिक को गरिमा, सुरक्षा और सम्मान के साथ कार्य करने का अधिकार मिले। इसका अर्थ है—स्वच्छ और सम्मानजनक आवास, पौष्टिक एवं स्वच्छ भोजन, समय पर चिकित्सा सुविधाएँ, सुरक्षित कार्यस्थल, और उचित समय पर न्यायसंगत वेतन।क्योंकि हमारा विश्वास है कि किसी भी संगठन की वास्तविक शक्ति उसकी परिसंपत्तियों में नहीं, बल्कि उन लोगों में होती है जो उन्हें खड़ा करते हैं। और यह विश्वास केवल हमारे व्यवसायों तक सीमित नहीं है।
यह उन समुदायों तक पहुँचता है जिनकी हम सेवा करते हैं, उन परिवारों तक पहुँचता है जिनके जीवन को हम छूते हैं, और उन भविष्य की पीढ़ियों तक पहुँचता है जिनके लिए हम अवसरों का निर्माण कर रहे हैं।इसीलिए, हमारे व्यावसायिक विस्तार के साथ-साथ अडानी फाउंडेशन भी हमारे उद्देश्य का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है।

आज फाउंडेशन 22 राज्यों के 7,000 से अधिक गाँवों में लगभग 1 करोड़ लोगों तक अपनी पहुँच बना चुका है। और अपने 30वें वर्ष में प्रवेश करते हुए, डॉ. प्रीति अडानी के सक्षम नेतृत्व में फाउंडेशन अभूतपूर्व पैमाने और नए संकल्प के साथ अपने मिशन को और गहराई दे रहा है।
स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में, हम बिहार में भारत के सबसे महत्वाकांक्षी ग्रामीण नेत्र-चिकित्सा मॉडल में से एक का निर्माण कर रहे हैं, जो सस्ती और गुणवत्तापूर्ण नेत्र देखभाल की संपूर्ण श्रृंखला को एक साथ जोड़ता है।
साथ ही, अडानी यूनिवर्सिटी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च तथा गुजरात अडानी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, भुज के माध्यम से हम किफायती स्वास्थ्य शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के उत्कृष्टता केंद्र विकसित कर रहे हैं।
इसी दिशा में अडानी हेल्थ सिटी हमारी स्वास्थ्य सेवा यात्रा का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है। अहमदाबाद और मुंबई में विकसित हो रहे एकीकृत स्वास्थ्य परिसरों में 1,000 बिस्तरों वाले बहु-विशेषता अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, ट्रांजिशनल केयर सुविधाएँ और अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्र शामिल होंगे।
कौशल विकास के क्षेत्र में, हम ग्रामीण भारत के 1.25 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। हम केवल कौशल नहीं दे रहे—हम आकांक्षाओं को रोजगार में, और रोजगार को सम्मानजनक जीवन में परिवर्तित कर रहे हैं। इस वर्ष हमने प्रशिक्षण को एक गतिविधि से आगे बढ़ाकर एक संगठित औद्योगिक क्षमता का रूप दिया है।

हजारों प्रशिक्षण घंटों के माध्यम से हमने युवाओं की रोजगार-तत्परता को नई मजबूती प्रदान की है।
गुजरात के कच्छ क्षेत्र में कर्मा उत्सव पहल के अंतर्गत ITI संस्थानों को अपनाकर हम स्थानीय रोजगार का एक सशक्त तंत्र विकसित कर रहे हैं, जिससे प्रतिभाओं का पलायन कम हो और अवसर स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हों। जब मैं हमारी इस यात्रा को देखता हूँ, तो मुझे एक ही उद्देश्य दिखाई देता है—
ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना जो भारत को शक्ति दे, और ऐसी संस्थाएँ बनाना जो समाज के हर स्तर पर मानव गरिमा को सुनिश्चित करें।

हर ईंट में सपना, हर धड़कन में विश्वास,
भारत की हर सुबह रचे नया इतिहास।
सपनों की यह पूंजी, संकल्पों का यह गान,
मिलकर हम गढ़ेंगे, एक सशक्त हिन्दुस्तान।

यह वर्ष उस वर्ष के रूप में याद किया जाए—जब हमने निर्माण किया, जबकि परिस्थितियाँ सबसे कठिन थीं। जब हमने विश्वास बनाए रखा, जबकि विश्वास करना सबसे चुनौतीपूर्ण था। और जब हमने सिद्ध किया कि दृढ़ता केवल हमारी विशेषता नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली है। निस्संदेह, आने वाला भविष्य हमसे और अधिक महत्वाकांक्षा, और अधिक अनुशासन तथा और अधिक उत्कृष्ट निष्पादन की अपेक्षा करेगा।

लेकिन हम तैयार हैं।
निर्माण के लिए तैयार।
सेवा के लिए तैयार।
और उस भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए तैयार,
जिसके सबसे श्रेष्ठ दिन अभी आने बाकी हैं।
क्योंकि हमारा विश्वास अटूट है—
भारत का भविष्य केवल उज्ज्वल नहीं, असाधारण है।

अंत में उन्होंने कहा कि अडानी समूह का लक्ष्य केवल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना नहीं, बल्कि भारत के भविष्य को आकार देना है और देश के विकास में साझेदार बने रहना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *