Kanwar yatra: सावन का पहला दिन और सड़कों पर बदल तस्वीर गई… कहीं भगवा रंग में डूबे कांवड़िए नजर आ रहे हैं तो कहीं सुरक्षा के अभेद किले तैयार हैं…हरिद्वार से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक रूट बदल गए हैं
आज से कांवड़ यात्रा का आगाज हो चुका है…लाखों शिवभक्त हरिद्वार, गोमुख और गंगोत्री से पवित्र गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य के शिवालयों की ओर निकल पड़े हैं… अब इन कांवड़ियों का अगला बड़ा पड़ाव होगा 11 अगस्त… जब सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा…. लेकिन इस आस्था के सैलाब के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है… यातायात व्यवस्था को संभालना। कांवड़ियों की सुरक्षा और सुगम यात्रा के लिए कई बड़े रूट में बदलाव किए गए हैं…
आज से दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे-34 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। ट्रकों और बसों के रूट डायवर्ट किए गए हैं। वहीं 4 अगस्त से 12 अगस्त के बीच मुजफ्फरनगर, मेरठ और दिल्ली-हरिद्वार कॉरिडोर के कई हिस्सों में सामान्य वाहनों की आवाजाही भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। ये रास्ते सिर्फ कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेंगे… कांवड़ यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा निगरानी पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के उन जिलों पर है, जहां श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा भीड़ पहुंचती है। सबसे बड़ा केंद्र है हरिद्वार, जहां एटीएस, बम स्क्वाड और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं..
वहीं मुजफ्फरनगर में NH-34 और गंगनहर पटरी का बड़ा हिस्सा आता है, इसलिए यहां ट्रैफिक और सुरक्षा दोनों पर खास नजर है… मेरठ में 28 कांवड़ मार्गों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सुरक्षा के लिए 148 से ज्यादा बैरियर लगाए गए हैं…गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर यानी नोएडा में दिल्ली से कनेक्टिविटी और एक्सप्रेसवे रूट को देखते हुए ड्रोन से निगरानी की जा रही है…बागपत के पुरा महादेव मंदिर, सहारनपुर, शामली और बरेली में भी प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है…
कई जगहों पर मांसाहारी दुकानों और शराब के ठेकों को बंद या स्थानांतरित किया गया है। वहीं आपात स्थिति से निपटने के लिए यूपी पुलिस ने हर करीब 4 किलोमीटर पर डायल-112 रिस्पांस प्वाइंट बनाए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जा सके… सावन की शुरुआत के साथ कांवड़ यात्रा का भी आगाज हो चुका है। आने वाले दिनों में लाखों शिवभक्त इन रास्तों से गुजरेंगे और 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक के साथ यात्रा का सबसे बड़ा दिन होगा। फिलहाल आस्था के इस सफर को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए प्रशासन ने भी पूरी ताकत झोंक दी है… ताकि भक्ति की राह में व्यवस्था की कोई बाधा न आए।
ट्रैफिक नियम:
भारी वाहनों पर रोक: 30 जुलाई से ही दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे (NH-34) और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों (ट्रकों/बसों) का रूट डायवर्ट कर दिया गया है।
पूर्ण प्रतिबंध (Full Highway Closure): 4 अगस्त से 12 अगस्त 2026 के बीच मुजफ्फरनगर, मेरठ और दिल्ली-हरिद्वार कॉरिडोर पर सभी प्रकार के सामान्य वाहनों (निजी कारों सहित) के चलने पर पूरी तरह रोक रहेगी। यह मार्ग केवल कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगा।
कांवड़ यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा हाई अलर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों और उत्तराखंड के हरिद्वार में रहता है। इन जिलों को सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और ट्रैफिक डायवर्जन के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है
सबसे ज्यादा अलर्ट वाले मुख्य जिले–
हरिद्वार (उत्तराखंड): यह पूरी यात्रा का मुख्य केंद्र (Ground Zero) है। यहाँ एटीएस (ATS), बम स्क्वाड और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात रहते हैं।
मुजफ्फरनगर (यूपी): यहाँ नेशनल हाईवे (NH-34) और गंगनहर पटरी का सबसे बड़ा हिस्सा आता है, जहाँ 4 अगस्त से वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
मेरठ (यूपी): मेरठ रेंज के 28 कांवड़ मार्गों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सुरक्षा के लिए 148 से ज्यादा बैरियर लगाए गए हैं।
गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर (नोएडा): दिल्ली से सटे होने और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का रूट होने के कारण यहाँ ड्रोन से निगरानी की जाती है।
बागपत (यूपी): ऐतिहासिक ‘पुरा महादेव मंदिर’ के कारण यहाँ लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे पुलिस चौबीसों घंटे अलर्ट पर रहती है।
सहारनपुर और शामली (यूपी): हरियाणा और पंजाब से आने वाले कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए इन जिलों में कड़ी चौकसी रहती है
बरेली (यूपी): यह पूर्वी/मध्य यूपी का एक बड़ा कांवड़ हब माना जाता है।