West Bengal: पश्चिम बंगाल में बीजेपी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी को शुक्रवार को बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया। इसके साथ ही, उनके लिए राज्य के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में बैठक के बाद हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारी के पश्चिम बंगाल बीजेपी विधायक दल के नेता के तौर पर चुने जाने की घोषणा की, नई बीजेपी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह नौ मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा।
कई मायनों में, अधिकारी ने ये उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने पांच साल के भीतर टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को चुनावी मोर्चे पर दो करारे झटके दिए हैं – पहला, 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान उनके अपने गढ़ नंदीग्राम में और दूसरा, शायद इससे भी ज्यादा प्रतीकात्मक रूप से, हाल ही में संपन्न चुनावों में बनर्जी के तथाकथित “अभेद्य” गढ़ भवानीपुर में।
उनकी जीतें और बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत की रूपरेखा तैयार करने में उनकी अहम भूमिका—इन दोनों ने मिलकर राज्य में पार्टी के शानदार उभार के मुख्य शिल्पकारों में से एक के तौर पर उनकी हैसियत को मजबूती से स्थापित कर दिया। भारतीय जनता पार्टी ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में 207 विधानसभा सीटें जीतीं, जो इस पूर्वी राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक युगांतरकारी बदलाव का प्रतीक है।
अधिकारी की राजनीतिक यात्रा में टकराव और सूझ-बूझ, दोनों का ही बराबर महत्व रहा है- खास तौर पर विपक्ष के नेता के तौर पर उनके पांच साल के कार्यकाल के दौरान, जब वे ममता बनर्जी की सरकार के खिलाफ मुख्य चुनौती बनकर उभरे। विधानसभा परिसर में तीखी विधायी लड़ाइयों से लेकर लगातार आंदोलनों तक, अधिकारी ने विपक्ष के नेता के तौर पर, सरकार की नीतियों और कानूनों के खिलाफ बीजेपी के अभियान में खुद को सबसे आगे रखा। वे अक्सर सदन के पटल पर अपनी जोशीली तकरीरों और तीखे हस्तक्षेपों से कार्यवाही पर हावी रहते थे।
15 दिसंबर, 1970 को अविभाजित मेदिनीपुर के करकुली में जन्मे शुभेंदु का पालन-पोषण एक राजनीतिक माहौल में हुआ और जैसे-जैसे उन्होंने बड़ी जिम्मेदारियां संभालने की इच्छा रखी, वे धीरे-धीरे पार्टी में ऊंचे पदों पर पहुंचते गए। उनके पिता शिशिर अधिकारी तृणमूल कांग्रेस से सांसद थे और मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री के तौर पर काम कर चुके थे। बाद में वे बीजेपी में शामिल हो गए।
शुभेंदु खुद तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के बाद 2020 से बीजेपी में हैं। उनके पार्टी छोड़ने के साथ ही, पूरा अधिकारी परिवार बीजेपी के साथ हो गया। कभी ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले शुभेंदु अधिकारी, पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल करने की बीेजेपी की सालों की कोशिशों में एक अहम कड़ी साबित हुए। शुभेंदु अधिकारी के भाई, दिब्येंदु अधिकारी- जो भी बीजेपी में हैं- ने हाल ही में हुए चुनावों में एगरा सीट से जीत हासिल की। शुभेंदु अधिकारी के कॉलेज के साथी उन्हें ऐसे व्यक्ति के तौर पर याद करते हैं, जो लंबे समय से खुद को पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार कर रहे थे।
उनके दोस्त उन्हें एक दयालु और सादा जीवन जीने वाले इंसान के तौर पर बताते हैं- एक ऐसा व्यक्ति जो मुश्किल में पड़े किसी भी इंसान की मदद के लिए तुरंत आगे आता है। उनमें से कुछ लोगों का कहना है कि एक आक्रामक सार्वजनिक हस्ती के तौर पर अपनी छवि के बावजूद, शुभेंदु अधिकारी अपनी निजी जिंदगी में शर्मीले और शांत स्वभाव के हैं।
शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को कहा कि हाल के चुनावों में जीती गई अपनी दो सीटों में से एक को वे 10 दिनों के भीतर छोड़ देंगे। हालांकि बीजेपी ने अभी तक औपचारिक तौर पर मुख्यमंत्री पद के लिए अपने चेहरे की घोषणा नहीं की है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल का नेतृत्व करने के लिए पार्टी की पसंद के तौर पर शुभेंदु अधिकारी उभर सकते हैं।