West Bengal: शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, बंगाल में भाजपा युग की शुरुआत

West Bengal:  पश्चिम बंगाल की राजनीति में 9 मई 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। आजादी के बाद पहली बार राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई और शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत भाजपा के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। शपथ लेने के बाद शुभेंदु अधिकारी पीएम मोदी के पास पहुंचे और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष समेत पांच विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली।

बीजेपी ने इस शपथ ग्रहण के लिए 9 मई गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर की जयंती का खास दिन चुना। बता दें कि बंगाल में बीजेपी ने ममता बनर्जी की टीएमसी को 207 सीटें जीतकर हरा दिया है. टीएमसी को सिर्फ 80 सीटें ही मिल सकीं।

पांच विधायकों ने ली शपथ-

शुभेंदु अधिकारी के साथ यह पांच विधायक भी मंत्री पद की शपथ ली हैं। इनमें शामिल हैं दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तिनिया, खुदीराम टुडू, निशिथ घोष।  इनमें एक महिला,एक मतुआ समुदाय से,एक राजबंशी,एक आदिवासी और एक ओबीसी समाज से मंत्री बनाए गए हैं

सीएम योगी ने पहनाया भगवा पट्टा-

शुभेंदु अधिकारी के शपथग्रहण समारोह की शुरुआत से पहले पीएम मोदी ने बंगाल के नए सीएम के साथ लंबा रोड शो किया. इस दौरान भारी भीड़ का उत्साह देखते ही बनता था. पीएम मोदी के साथ गाड़ी में शुभेंदु और बंगाल के चीफ समिक भट्टाचार्य भी मौजूद थे. इस दौरान मंच पर अमित शाह, रक्षा मंत्रा राजनाथ सिंह, सीएम योगी, शिवराज सिंह चौहान समेत 21 राज्यों के सीएम और बाकी केंद्रीय मंत्री भी मौजूद थे. पीएम मोदी ने इसके बाद मंच पर रबींद्रनाथ टैगौर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. सबसे खास बात यह रही कि पश्चिम बंगाल के नए सीएम को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शपथ से पहले भगवा पट्टा पहनाया. ये तस्वीर भी खूब वायरल हो गई.

पीएम ने छुए पैर-

प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के वरिष्ठतम कार्यकर्ताओं में से एक माखनलाल सरकार का अभिनंदन किया और उनसे आशीर्वाद लिया। 1952 में, भारतीय तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कश्मीर में मौजूद माखनलाल सरकार को गिरफ्तार कर लिया गया था। 98 वर्ष की आयु में भी श्री माखनलाल सरकार स्वतंत्रताोत्तर भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े शुरुआती जमीनी स्तर के नेताओं में से एक हैं।

 

 

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