Rahul Gandhi: राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले में शिकायतकर्ता को पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने का अंतिम मौका

Rahul Gandhi: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की एक विशेष अदालत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता को पहले के एक आदेश के विरुद्ध पुनरीक्षण याचिका दायर करने का अंतिम अवसर देते हुए मामले की सुनवाई 21 मई तक टाल दी।

राहुल के वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने बताया कि मामले में बहस सोमवार को होनी थी, लेकिन शिकायतकर्ता के वकील ने स्थगन का अनुरोध करते हुए अदालत को सूचित किया कि वह पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से पहले के एक आदेश को चुनौती देना चाहते हैं।

शिकायतकर्ता और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के स्थानीय नेता विजय मिश्रा के वकील संतोष कुमार पांडे ने कहा कि वह सबूतों के सत्यापन से संबंधित मामले को आगे बढ़ाना चाहते हैं। पांडे ने बताया कि उनकी पिछली अर्जी खारिज हो गई थी, जिसके खिलाफ वह ऊपरी अदालत का रुख करने के इच्छुक हैं।

पांडे ने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी के आ‍वाज के नमूने का मिलान मामले के सिलसिले में पेश सीडी में मौजूद आवाज के साथ करने का अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के बाद उच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की जाएगी और इसी आधार पर उन्होंने विशेष अदालत से समय देने का अनुरोध किया था।

इससे पहले, सुल्तानपुर की विशेष सांसद और विधायक अदालत ने शिकायतकर्ता के वकील की ओर से दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-311 के तहत दायर आवेदन को दो मई को खारिज कर दिया था और मामले में अंतिम बहस के लिए 11 मई की तारीख तय की थी।

मिश्रा ने अक्टूबर 2018 में कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के सिलसिले में मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। राहुल ने 20 फरवरी 2024 को अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था, जिसके बाद विशेष मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो जमानतदारों पर जमानत दे दी थी।

राहुल 26 जुलाई 2024 को सांसद और विधायक अदालत में पेश हुए और अपना बयान दर्ज कराया, जिसमें उन्होंने खुद के बेगुनाह होने का दावा किया और कहा कि यह मामला एक सियासी साजिश का हिस्सा है। कांग्रेस नेता के बयान दर्ज होने के बाद अदालत ने शिकायतकर्ता पक्ष को सबूत पेश करने का निर्देश दिया, जिसके बाद मामले में गवाहों से पूछताछ की गई।

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