LPG Gas: एलपीजी की कमी न होने के दावों के बीच देश भर में मची अफरा-तफरी

LPG Gas:  एलपीजी संकट का असर देश के कई शहरों में देखने को मिल रहा है। भले ही अधिकारी घरेलू इस्तेमाल के लिए सिलेंडरों की कमी न होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन कई शहरों में लोग गैस एजेंसियों के बाहर सिलेंडर भरवाने के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एक इलाके के लोगों ने बताया कि वे पिछले दो-तीन दिनों से शहर के एलपीजी डीलर के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकला।

लोगों का कहना है कि “हमने कल बुक किया था। बुक तो परसों किया था, कह रहे थे कल कि आज गाड़ी नहीं आई। आज गाड़ी आएगी, फिर आज कह रहे हैं कि खत्म हो गए हैं, मसला यही है कि हम लोग रोजे में भी धूप में भी परेशान हो रहे हैं। सिर्फ इसलिए कि खाना बनाने के लिए गैस मिल जाए। और आज नहीं मिलेगी तो हम फिर कल सुबह से आकर लगेंगे। परेशान तो जनता को होना ही है। और जनता का काम ही है परेशान करना।”

वहीं उत्तराखंड में हरिद्वार के लोगों का कहना है कि उन्हें लगता है कि घरेलू एलपीजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, लेकिन सिलेंडर बुकिंग में दिक्कतें आ रही हैं। कई लोगों का कहना है कि कुछ दिन पहले तक फोन के जरिए सिलेंडर की बुकिंग आसानी से हो जाती थी, लेकिन अब वो पूरी तरह बंद हो गई है। इसकी वजह से उन्हें गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

एलपीजी डीलर दावा कर रहे हैं कि दिक्कत इसलिए हो रही है क्योंकि कई लोगों ने अपना केवाईसी अपडेट नहीं कराया है। वे ये कहना नहीं भूलते की घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है।

एलपीजी डीलर राकेश ने बताया कि  “मेन बात दिक्कत ये है कि लोगों की केवाईसी अपडेट नहीं है। कई बार डिमांड करी। फोन करने के बाद भी लोग केवाईसी कराने नहीं आ रहे। हम बाहर हैं, हम यहां रह रहे हैं, वहां रह रहे हैं। हम दो दिन बाद आके केवाईसी करवाएंगे। ये केवाईसी लिमिट क्रॉस होने के चक्कर में ये भीड़ लग रही है। और कोई रीजन नहीं है। गैस की शॉर्टेज नहीं है। गैस पूर्ण रूप से है, लेकिन केवाईसी कम्पल्सरी है।”

लखनऊ, नोएडा, पुणे और शिवगंगा समेत देश के कई और शहरों में भी एलपीजी सिलेंडर के लिए लोगों की लंबी कतारें देखी गईं।  इस बीच, गुरुवार को त्रिशूर में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि एलपीजी संकट को काबू में करने की कोशिशें जारी हैं और भारत के लिए अतिरिक्त आपूर्ति हासिल करने के रास्ते खुल रहे हैं।

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