Jammu kashmir: जम्मू-कश्मीर के रामबन में फिर आया भूस्खलन, प्रशासन अलर्ट

Jammu kashmir: जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के रामसू इलाके में एक बार फिर भूस्खलन की घटना सामने आई, भूस्खलन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) के किनारे स्थित बिसलेरी नाले का बहाव आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल स्थिति गंभीर नहीं है और तत्काल लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की जरूरत नहीं है।

रामसू के उपमंडल मजिस्ट्रेट (SDM) मुजाहिर हुसैन शाह ने बताया कि भूस्खलन उसी क्षेत्र के आसपास हुआ है, जहां पिछले साल भी बड़ा भूस्खलन हुआ था। उस समय बिसलेरी नाले का बहाव पूरी तरह प्रभावित हो गया था और एहतियात के तौर पर स्थानीय लोगों को करीब 15-20 दिनों के लिए पास के सरकारी स्कूल में शिफ्ट किया गया था।

उन्होंने बताया कि उस दौरान लोगों के लिए भोजन, पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। स्थिति सामान्य होने के बाद लोगों को वापस उनके घरों में भेज दिया गया था। इस बार मानसून के दौरान फिर से भूस्खलन हुआ है, जिससे नाले का बहाव आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है, लेकिन अभी स्थिति ऐसी नहीं है कि लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर भेजना पड़े। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसी भी संभावित हादसे को रोकने के लिए हाई अलर्ट पर है।

वहीं, जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ के कारण लगातार 10 दिनों तक बाधित रही 132 KV बिजली ग्रिड की आपूर्ति को सुरक्षित रूप से बहाल कर दिया गया है। भारी बारिश के कारण पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (PDD) के बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा था। राजौरी और थन्नामंडी के बीच दो से तीन बिजली के टावर बह जाने के कारण पूरे पुंछ जिले की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई थी।

PDD के प्रभारी कार्यकारी अभियंता (XEN) अल्ताफ अहमद खान ने बताया कि हाल में हुई भारी बारिश से विभाग के बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा। विभाग के कर्मचारियों ने दिन-रात काम करके बिजली आपूर्ति बहाल करने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि शुरुआत में आपात सेवाओं को जारी रखने के लिए अस्थायी व्यवस्था के जरिए बिजली आपूर्ति बहाल की गई थी, लेकिन इससे पूरे जिले की बिजली की मांग पूरी नहीं हो पा रही थी। अब क्षतिग्रस्त ट्रांसमिशन टावरों को इमरजेंसी रेस्टोरेशन सिस्टम (ERS) की मदद से बहाल कर दिया गया है, जिससे पुंछ जिले को उसकी पूरी बिजली आपूर्ति मिल रही है।

इससे पहले 19 जुलाई को हुई भारी बारिश और उसके बाद बादल फटने की घटना के कारण बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ था। इससे थन्नामंडी-डीकेजी-बुफलियाज रोड को भी काफी नुकसान पहुंचा। यह सड़क सीमा सड़क संगठन (BRO) की महत्वपूर्ण परियोजना है और राजौरी तथा पुंछ जैसे सीमावर्ती जिलों को कश्मीर घाटी से जोड़ने में अहम भूमिका निभाती है। भारी बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ में थन्नामंडी से बुफलियाज के बीच कई जगहों पर नवनिर्मित सड़क के हिस्से, पुलिया और बड़े पेड़ बह गए थे। प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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