IIT रुड़की ने भूकंप की चेतावनी देने वाली प्रणाली विकसित की, भूकंप से जुड़े रिसर्च को मिलेगी मजबूती

IIT: जब जमीन हिलती है, तो उस पर बनी हर चीज भी हिलती है, लेकिन हमेशा एक ही तरह से नहीं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी रुड़की में वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि भूकंप आने पर मिट्टी और नींव पर क्या असर पड़ता है और उन ताकतों का सामना करने के लिए इमारतों को कैसे बेहतर ढंग से बनाया जा सकता है।

प्रयोगशाला में मिट्टी के नमूने की जांच से लेकर असल आकार की इमारतों पर बहुत ज्यादा दबाव डालकर देखने तक, शोधकर्ता यह जांच कर रहे हैं कि जमीन और उस पर बनी चीजें भूकंपीय हलचल पर कैसे प्रतिक्रिया देती हैं। संस्थान का काम सिर्फ प्रयोगशाला तक ही सीमित नहीं है, यह भूकंप के लिहाज से संवेदनशील हिमालयी इलाकों में अहम बुनियादी ढांचों तक भी फैला हुआ है।

इसका भूकंप-मापी केंद्र दशकों से भूकंपीय गतिविधियों पर नजर रख रहा है। टिहरी बांध पर 18 स्टेशन लगातार वास्तविक समय में भूकंप का डेटा रिकॉर्ड करते हैं। ऐसे नेटवर्क से इकट्ठा किया गया डेटा आईआईटी रुड़की के भूकंप की शुरुआती चेतावनी देने वाली प्रणाली में भी इस्तेमाल किया जाता है।

इस स्वदेशी सिस्टम को सबसे पहले 2015 में उत्तराखंड में लगाया गया था। तब से इसने लगभग 20 सफल चेतावनियां जारी की हैं। यह सिस्टम भूकंप के झटके आने से 40 सेकंड पहले तक लोगों को अलर्ट करता है। इसके लिए संस्थान द्वारा बनाए गए एक ऐप का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे अब 80,000 से ज्यादा लोग इस्तेमाल कर रहे हैं।

आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक न सिर्फ मिट्टी के पैटर्न का अध्ययन कर रहे हैं, बल्कि भूकंपीय गतिविधियों के बारे में लोगों को आगाह करने में भी मदद कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनके द्वारा दी गई जानकारी न केवल लोगों की जान और संपत्ति की रक्षा करेगी, बल्कि भूकंप-संभावित इलाकों में सुरक्षित निर्माण और बेहतर अवसंरचना डिजाइन में भी योगदान देगी।

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