Ayodhya: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप अयोध्या के दीपोत्सव में इस बार धार्मिक आस्था के साथ कलात्मक प्रतिभा की भी अनूठी झलक देखने को मिलेगी। रामकथा पार्क के निकट सरयू तट पर रेत से भगवान श्रीराम के भव्य दरबार को आकार दिया जा रहा है। विशाल सैंड आर्ट के रूप में तैयार हो रही यह कलाकृति दीपोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी।
इस भव्य रचना को बनाने में करीब 220 टन बालू का इस्तेमाल किया जा रहा है। 50 फीट लंबी और 20 फीट ऊंची इस कलाकृति में भव्य राम मंदिर के साथ भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की आकृतियां उकेरी जा रही हैं। इसकी विशाल संरचना और बारीक कलात्मक काम इसे खास बना रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाले बिहार के सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार अपने सहयोगियों के साथ इस निर्माण को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस रचना के जरिए अयोध्या की धार्मिक आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को कला के माध्यम से प्रस्तुत किया जा रहा है।
रेत की कलाकृति के जरिए शांति और सद्भाव का संदेश
220 टन बालू से तैयार हो रहा राम दरबार कलाकारों की रचनात्मकता और मेहनत का शानदार उदाहरण होगा। इसमें राम मंदिर की भव्य संरचना के साथ राम परिवार के स्वरूपों को विशेष रूप से दर्शाया जा रहा है। कलाकारों का उद्देश्य इस सैंड आर्ट के माध्यम से रामायण की भावनाओं और भगवान श्रीराम के आदर्शों को लोगों तक पहुंचाना है। साथ ही, यह कलाकृति विश्व शांति, प्रेम और आपसी भाईचारे का संदेश भी देगी।
इस सैंड आर्ट के आकार और विशेषता को देखते हुए इसे विश्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए आवेदन भी किया गया है। दीपोत्सव के दौरान अयोध्या पहुंचने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह रचना एक प्रमुख आकर्षण बनने जा रही है।
35 हजार से ज्यादा कलाकृतियां बना चुके हैं मधुरेंद्र कुमार
सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार को उनकी अनूठी कला के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उनके अनुसार, वह अब तक 35 हजार से अधिक कलाकृतियां बना चुके हैं। उनकी कला का दायरा केवल रेत तक सीमित नहीं रहा है। वह राख, पत्तियों, पत्थरों, धातुओं और फल-सब्जियों जैसी अलग-अलग सामग्रियों से भी आकर्षक रचनाएं तैयार कर चुके हैं। जर्मनी, जापान, रूस, अमेरिका, नेपाल और भूटान समेत कई देशों में वह अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मान हासिल किए हैं।
भगवान बुद्ध के जीवन पर बना चुके हैं 50 रेत की प्रतिमाएं
मधुरेंद्र कुमार को यूएन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान मिल चुका है। उन्होंने भगवान बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित 50 अलग-अलग रेत की प्रतिमाएं तैयार की थीं। उनकी कलाकृतियां सामाजिक सरोकारों और वैश्विक संदेशों को रचनात्मक रूप में सामने लाने के लिए जानी जाती हैं।
अयोध्या में बन रहा राम दरबार भी इसी कलात्मक परंपरा का हिस्सा है। इसमें भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा के साथ भारतीय संस्कृति, विश्व शांति और वसुधैव कुटुंबकम की भावना को भी अभिव्यक्त किया जा रहा है। दीपोत्सव के दौरान यह विशाल सैंड आर्ट रामनगरी की सुंदरता और आयोजन की भव्यता में एक नया रंग जोड़ेगी।