खलंगा युद्ध में गोरखा सैनिकों ने फिरंगी सेना के कर दिए थे दांत खट्टे

नमिता बिष्ट

27 नवंबर से 48वां खलंगा मेले का आयोजन किया जा रहा है। जिसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 1814 में हुए खलंगा युद्ध के वीर-वीरांगनाओं की कृतियों एवं बलिदान की स्मृति में नालापानी में आयोजित मेले में अंग्रेजों को हराने वाले गोरखा वीरों को याद किया जाता है। गोरखा सैनिकों ने इस युद्ध में फिरंगियों के दांत खट्टे कर दिए थे।

बलभद्र ने अंग्रेजी के किए थे दांत खट्टे
खलंगा को गोरखा किला के नाम से जाना जाता था। साल 1814 में देहरादून में नालापानी के समीप खलंगा पहाड़ी पर महज 600 गोरखा सैनिकों ने हजारों की फिरंगी सेना के पसीने छुड़ा दिए थे। इस युद्ध में गोरखा सेना का नेतृत्व कर रहे बलभद्र बलिदानी हो गए थे। तब गोरखा सैनिकों के पास हथियारों के नाम पर केवल खुखरियां थी, जबकि अंग्रेज फौज के पास बंदूक और तोपें थीं।

पत्थरों की बरसात से फिरंगी सेना को खदेड़ा
बता दें कि विश्व इतिहास में अंग्रेजों और गोरखाओं के मध्य 1814 के अक्टूबर व नवंबर में नालापानी देहरादून में युद्ध हुआ था। जिसमें गोरखाओं की ओर से बलभद्र थापा सेनानायक के रूप में अंग्रेजों से लड़े। बलभद्र ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अंग्रेजों से मुकाबला किया। तब खलंगा में केवल 600 लोग रहते थे, जिनमें स्त्रियां और बच्चे थे। इस दौरान खलांगा निवासी स्त्रियों और बच्चों का पत्थरों का संग्रहण खूब काम आया। पहाड़ी से हुई पत्थरों की बरसात ने फिरंगी सेना को खदेड़ने में खूब काम किया था।

बलभद्र को आत्मसमर्पण करने का दिया था प्रस्ताव
फिरंगी सेना को विश्वास था कि खलंगा का सेनापति आत्मसमर्पण कर देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ब्रिटिश दूत का संदेश जब बलिदानी बलभद्र के पास पहुंचे तो उन्होंने इसे पढ़ने से मना कर फाड़ दिया और युद्ध लड़ने का फैसला किया।

गोरखा सैनिकों ने अद्भुत रण कौशल दिखाया
तब ईस्ट इंडिया कंपनी के करीब तीन हजार सैनिक इस गोरखा इलाके के पास मौजूद थे। रणनीति बनाकर पहुंची फिरंगी सेना को दो बार पीछे हटना पड़ा था। इस युद्ध में अंग्रेजी सेना के जनरल गैलेप्सी मारे गए। हालांकि गोरखा किले को अंग्रेजों ने अपने आधिपत्य में ले लिया था, लेकिन बलभद्र और उनके साथी अंग्रेजों के हाथ नहीं लगे। इस युद्ध में गोरखा सैनिकों ने अद्भुत रण कौशल दिखाया था।

खलंगा क्या है?
खलंगा नेपाली भाषा का शब्द है, इसका अर्थ छावनी या कैंटोनमेंट होता है। युद्ध के ठीक पहले बलिदानी बलभद्र ने जैसे-तैसे पत्थर की चहारदीवारी खड़ी की और युद्ध लड़ा।

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