Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के मंत्री सुरेश खन्ना ने राम मंदिर चंदा गबन के कथित मामले की जांच को लेकर राज्य सरकार की सख्त नीति दोहराई। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले की पारदर्शी जांच सुनिश्चित कर रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सुरेश खन्ना ने कहा कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ शुरू से ही “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, “यह योगी जी की सरकार है और यह सरकार शुरू से ही अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस का नारा लेकर चल रही है। उसी के अनुरूप कार्रवाई भी की जा रही है। कोई भी अपराधी बख्शा नहीं जाएगा। जिसने भी गलत किया है, उसे निश्चित रूप से सजा मिलेगी।”
संत समाज ने भी की कड़ी कार्रवाई की मांग
वहीं, राम मंदिर में प्राप्त दानराशि के कथित गबन को लेकर दर्ज एफआईआर पर अयोध्या के संत समाज ने भी प्रतिक्रिया दी है। कई संतों और धार्मिक नेताओं ने दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
हालांकि विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई को एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन कुछ संतों ने जांच को और अधिक प्रभावी बनाने तथा जल्द निष्कर्ष तक पहुंचाने की मांग की है। आध्यात्मिक प्रवचनकर्ता करपात्री महाराज ने कहा, “मैं एसआईटी की जांच से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हूं। मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह करता हूं कि इस मामले में और सख्त कार्रवाई की जाए। ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें अयोध्या से बाहर किया जाना चाहिए।”
कई धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर
यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं—306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5)—के तहत दर्ज किया गया है। एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव सहित अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
7 से 7.5 करोड़ रुपये के गबन का आरोप
यह कार्रवाई समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडेय द्वारा लगाए गए उन आरोपों के बाद हुई, जिनमें उन्होंने दावा किया था कि राम मंदिर को प्राप्त दानराशि में से करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये का गबन किया गया है। इन आरोपों के बाद राज्य सरकार ने 14 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। यह कदम श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उठाया गया।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
इस बीच, मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका भी दायर की गई है। याचिका में एफआईआर दर्ज करने के साथ-साथ सीबीआई के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर मामले की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं, धनराशि के गायब होने और अन्य अवैध गतिविधियों की विस्तृत जांच की मांग की है।