UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार ने नवंबर-दिसंबर 2026 और जनवरी 2027 की कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत स्कूलों में शैक्षिक गतिविधियों, विद्यार्थियों की प्रगति और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी की जाएगी। महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी की ओर से जारी निर्देशों में की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स (KPI) के आधार पर लक्ष्य तय करने और निर्धारित समय में उन्हें पूरा करने पर जोर दिया गया है।
जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को कार्ययोजना के मुताबिक गतिविधियां पूरी कराने के साथ उनकी प्रगति संबंधित पोर्टल पर दर्ज करने की जिम्मेदारी दी गई है। KPI की हर महीने समीक्षा होगी, ताकि योजनाओं की स्थिति का आकलन करने के साथ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सके।
मासिक और साप्ताहिक बैठकों से होगी कार्यों की समीक्षा
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जिला स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। नेशनल बेंचमार्किंग एंड मॉनिटरिंग कमेटी (NBMC) से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स (DTF) की मासिक बैठक में शैक्षिक प्रगति की समीक्षा होगी। इसके अलावा बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA), खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) के साथ हर सप्ताह बैठक करेंगे, जबकि BEO और अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) की मासिक समीक्षा बैठक होगी।
इन बैठकों का कार्यवृत्त संबंधित पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। समग्र शिक्षा और पीएम पोषण योजना के तहत होने वाले कार्यों तथा खर्च का विवरण भी समय पर पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा।
शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटल लर्निंग को मिलेगा बढ़ावा
कार्ययोजना में शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने और आधुनिक शिक्षण संसाधनों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए विकासखंड स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शिक्षकों को दीक्षा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध डिजिटल सामग्री और निष्ठा कोर्स का उपयोग कक्षा शिक्षण में करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
इसके साथ ही प्रोजेक्ट आधारित, गतिविधि आधारित और कैच-अप शिक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर रहेगा। विद्यार्थियों के निपुण लक्ष्य, उनके शैक्षिक आकलन और प्रगति पत्रक को नियमित रूप से अपडेट करने की भी निगरानी की जाएगी।
कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों का दो चरणों में होगा निपुण आकलन
बुनियादी शिक्षा के स्तर को परखने के लिए कक्षा एक और दो के विद्यार्थियों का निपुण विद्यालय आकलन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कराया जाएगा। पहला चरण 21 से 30 दिसंबर 2026 और दूसरा चरण 20 से 30 जनवरी 2027 के बीच पूरा किया जाएगा। अधिकारियों को यह प्रक्रिया पारदर्शी और तय समयसीमा के भीतर संपन्न कराने के निर्देश दिए गए हैं।
निपुण लक्ष्य हासिल करने वाले बच्चों की उपलब्धियों पर नजर रखने के साथ विद्यालयों में प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण सामग्री के नियमित इस्तेमाल को भी सुनिश्चित किया जाएगा।
75 जिलों में मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों और KGBV की प्रगति पर नजर
प्रदेश के सभी 75 जिलों में मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों के निर्माण कार्यों की गति और गुणवत्ता की समीक्षा की जाएगी। वहीं, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) के स्वीकृत निर्माण कार्यों को समय पर पूरा कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा छात्राओं के नामांकन और उपस्थिति की नियमित समीक्षा होगी। संबंधित अधिकारियों को निर्धारित संख्या में विद्यालयों का निरीक्षण कर जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं का जायजा लेने के निर्देश दिए गए हैं।
RTE, बाल वाटिका और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष ध्यान
शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत आवंटित बच्चों का शत-प्रतिशत सत्यापन पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा। प्री-प्राइमरी शिक्षा के तहत 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का बाल वाटिका में प्रवेश, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) गतिविधियों और आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ समन्वय की निगरानी भी होगी।
सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के लिए लर्निंग बाय डूइंग, स्कूल चलो अभियान और स्कूल से बाहर रह गए बच्चों की पहचान, सर्वे तथा नामांकन से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों और डिजिटल शिक्षा पर भी फोकस
समेकित शिक्षा के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें जरूरी सहायक उपकरण और शैक्षिक संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही U-DISE+ पोर्टल पर संबंधित आंकड़ों को अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं।
डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में नए नामांकन का डाटा, जिला रैंकिंग के लिए जरूरी सूचनाएं, ICT सुविधाएं, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और APAAR ID से जुड़े कार्यों की प्रगति भी पोर्टल पर दर्ज की जाएगी।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अधिगम सरकार की प्राथमिकता
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के बेहतर अधिगम परिणामों के लिए प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक, KPI आधारित निगरानी व्यवस्था से शैक्षिक गतिविधियों की नियमित समीक्षा होगी और तय समयसीमा में लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।