kanpur: ‘जब रोता है पत्थर, तब बरसते हैं इंद्रदेव’, कानपुर के रहस्यमयी गर्भगृह में टपकती हैं बूंदें

kanpur: क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है, जो मौसम विभाग और सुपर कंप्यूटर से पहले ही मानसून का हाल बता देता हो? उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के भीतरगांव ब्लॉक स्थित बेहटा बुजुर्ग गांव में बना भगवान जगन्नाथ जी का प्राचीन मंदिर इन दिनों फिर से रहस्य, आस्था और चमत्कार का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।

कहा जाता है कि यह मंदिर मानसून आने से करीब 15 से 20 दिन पहले ही बारिश का संकेत दे देता है। हैरानी की बात यह है कि जब बाहर भीषण गर्मी और नौतपा का प्रकोप चरम पर होता है, तब मंदिर के गर्भगृह के शिखर से पानी की बूंदें टपकने लगती हैं। इस बार भी 26 मई से मंदिर के रहस्यमयी पत्थर से पानी की बूंदें गिरना शुरू हो गई हैं, जिसके बाद ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी लौट आई है।

ग्रामीणों का दावा है कि यह कोई साधारण पत्थर नहीं, बल्कि प्रकृति का अद्भुत ‘मौसम विज्ञान केंद्र’ है। मंदिर के गर्भगृह के ऊपर लगा दुर्लभ आयताकार पत्थर हर साल मानसून से पहले संकेत देता है। मान्यता है कि बूंदों का आकार जितना बड़ा होता है, बारिश उतनी ही ज्यादा होती है। वहीं छोटी बूंदें सूखे की आशंका मानी जाती हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस बार बूंदों का घनत्व धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि 20 से 25 जून के बीच इलाके में अच्छी मानसूनी बारिश शुरू हो सकती है। सबसे रहस्यमयी बात यह है कि जैसे ही बाहर पहली बारिश होती है, मंदिर का यह पत्थर पूरी तरह सूख जाता है।

जहां आधुनिक मौसम विज्ञान कई बार गलत साबित हो जाता है, वहीं ग्रामीणों का विश्वास है कि जगन्नाथ मंदिर की यह भविष्यवाणी आज तक कभी फेल नहीं हुई। यही वजह है कि हर साल मानसून से पहले यहां श्रद्धालुओं और जिज्ञासुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। इतिहास और रहस्य से भरा यह मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है। बौद्ध मठ जैसी संरचना वाले इस मंदिर की दीवारें करीब 14 फीट मोटी हैं। गर्भगृह में भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ और बहन सुभद्रा की काले चिकने पत्थरों से बनी भव्य मूर्तियां स्थापित हैं।

पुरातत्व विभाग के कई सर्वे के बावजूद आज तक यह साफ नहीं हो पाया कि मंदिर का निर्माण कब और किसने कराया। हालांकि मंदिर की बाहरी दीवारों पर बने मोर और चक्र के निशान देखकर इसे राजा हर्षवर्धन काल यानी 9वीं सदी का माना जाता है। माना जाता है कि बाद में 11वीं शताब्दी के आसपास इसका जीर्णोद्धार कराया गया था।

सदियां बीत गईं, तकनीक बदल गई, मौसम विज्ञान ने नई ऊंचाइयां छू लीं, लेकिन कानपुर का यह रहस्यमयी जगन्नाथ मंदिर आज भी मानसून के सबसे बड़े रहस्य के रूप में लोगों की आस्था और वैज्ञानिकों की जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है।

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