Sports: भारतीय खिलाड़ियों ने युवा ओलंपिक खेलों में शानदार प्रदर्शन जारी रखा है, तैराक धिनिधि देशिंगु ने महिला 100 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया, जबकि जूडो खिलाड़ी खुशबू राजकभाई ने फाइनल में जगह बनाकर नया इतिहास रच दिया। खुशबू युवा ओलंपिक के खिताबी मुकाबले तक पहुंचने वाली दूसरी भारतीय जूडो खिलाड़ी बन गई हैं। महिला 63 किग्रा वर्ग के फाइनल में पहुंचने के साथ ही उन्होंने भारत के लिए कम से कम रजत पदक सुनिश्चित कर लिया है।
बेंगलुरु की 16 वर्षीय तैराक धिनिधि ने 100 मीटर फ्रीस्टाइल का फाइनल 56.27 सेकंड में पूरा कर तीसरा स्थान हासिल किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण क्रोएशिया की एना बोबानोविच ने 55.89 सेकंड के समय के साथ जीता, जबकि न्यूजीलैंड की एलिसा लॉसन 56.13 सेकंड में रेस पूरी कर दूसरे स्थान पर रहीं।
धिनिधि ने फाइनल से पहले हीट में भी अच्छा प्रदर्शन किया था। उन्होंने 56.80 सेकंड का समय निकालकर अपनी हीट में पहला स्थान हासिल किया और फाइनल के लिए तीसरी सबसे तेज तैराक के रूप में क्वालीफाई किया। हीट में बोबानोविच ने 56.22 सेकंड और लॉसन ने 56.53 सेकंड का समय दर्ज किया था।
जूडो के फाइनल में जर्मनी की खिलाड़ी से भिड़ेंगी खुशबू
गुजरात की 15 वर्षीय खुशबू राजकभाई अब महिला 63 किग्रा वर्ग के फाइनल में जर्मनी की कैडेट विश्व चैंपियन जोलिना रेनहोल्ड का सामना करेंगी। अगर खुशबू यह मुकाबला जीतने में सफल रहती हैं, तो वह युवा ओलंपिक में जूडो का स्वर्ण पदक हासिल करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन जाएंगी।
इससे पहले थांगजाम तबाबी देवी युवा ओलंपिक में भारत के लिए जूडो पदक जीतने वाली खिलाड़ी रही हैं। उन्होंने 2018 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में आयोजित युवा ओलंपिक में महिला 44 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता था।
युवा ओलंपिक की व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भारत के लिए 2018 में निशानेबाज मनु भाकर और सौरभ चौधरी ने क्रमशः महिला और पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीते थे। वहीं, भारोत्तोलक जेरेमी लालरिनुंगा ने पुरुष 62 किग्रा वर्ग में स्वर्ण अपने नाम किया था।
लगातार तीन जीत के साथ फाइनल में पहुंचीं खुशबू
खुशबू ने नॉकआउट दौर में दमदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। प्री-क्वार्टर फाइनल में उन्होंने गिनी की मामइस्सता कैमारा को ‘युको’ के आधार पर 1-0 से हराया। जूडो में युको किसी प्रभावी तकनीक के लिए दिया जाने वाला कम अंक होता है।
इसके बाद क्वार्टर फाइनल में खुशबू ने मोरक्को की अबीर बुआज्जाउई को ‘इप्पोन’ से मात दी। इप्पोन जूडो में मिलने वाला सर्वोच्च स्कोर है, जिसके मिलते ही मुकाबला समाप्त हो जाता है। इसे प्रतिद्वंद्वी को प्रभावी ढंग से गिराकर और उस पर मजबूत नियंत्रण बनाकर हासिल किया जा सकता है।
सेमीफाइनल में भी खुशबू का दबदबा कायम रहा। उन्होंने अल्जीरिया की दुनिया बेराहुआल को इप्पोन के जरिए पराजित कर फाइनल का टिकट हासिल किया। इस मुकाबले में उनकी प्रतिद्वंद्वी को ‘हांसोकु-माके’ दंड मिला, जो जूडो में गंभीर नियम उल्लंघन के लिए दिया जाने वाला दंड है। इसके तहत खिलाड़ी को मुकाबले से अयोग्य घोषित कर दिया जाता है और विरोधी को इप्पोन के आधार पर विजेता माना जाता है।
अब सभी की निगाहें खुशबू के फाइनल मुकाबले पर हैं, जहां उनके पास युवा ओलंपिक में भारत के लिए जूडो का पहला स्वर्ण पदक जीतने का मौका होगा।