SIR प्रक्रिया में चुनाव आयोग का बड़ा बदलाव, ऑनलाइन फॉर्म-6 और घोषणा पत्र अब अलग-अलग जमा होंगे

SIR: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में अहम बदलाव किया है। अब एसआईआर वाले राज्यों में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-6 और उसके साथ जमा किए जाने वाले घोषणा पत्र को अलग-अलग सबमिट करना होगा। इसके लिए आवेदकों को दोनों दस्तावेजों का अलग-अलग ओटीपी सत्यापन और ई-साइन भी करना पड़ेगा। आयोग ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में दिए गए जवाब के अनुरूप उठाया है।

दरअसल, मतदाता सूची में पहली बार नाम दर्ज कराने के इच्छुक लोगों को फॉर्म-6 भरना होता है। बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया के बाद निर्वाचन आयोग ने इस फॉर्म के साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र भी अनिवार्य किया था। इसमें आवेदकों से उनके माता-पिता से संबंधित एसआईआर का विवरण मांगा गया था।

ऑफलाइन आवेदन के दौरान फॉर्म-6 और घोषणा पत्र अलग-अलग जमा किए जाते थे, लेकिन ऑनलाइन व्यवस्था में दोनों दस्तावेज एक ही ओटीपी और ई-साइन के जरिए सबमिट हो रहे थे। इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे कि क्या केंद्रीय कानून मंत्रालय की अनुमति के बिना निर्धारित फॉर्म-6 के प्रारूप में बदलाव किया गया है।

निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि अब दोनों दस्तावेजों को जमा करने की प्रक्रिया अलग कर दी गई है। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पहले आवेदकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक ही ओटीपी और ई-साइन से दोनों दस्तावेज जमा करने की व्यवस्था थी। लेकिन नए नियम के तहत अब फॉर्म-6 और एसआईआर घोषणा पत्र के लिए अलग-अलग सत्यापन करना होगा। आवेदन पूरा करने के लिए दोनों प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक संपन्न करना अनिवार्य होगा।

सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में दाखिल जवाबी हलफनामे में निर्वाचन आयोग ने बताया था कि उसके मतदाता सूची प्रभाग ने 21 अक्टूबर को ऑनलाइन आवेदन व्यवस्था में बदलाव का फैसला लिया था। इसके तहत डिजिटल माध्यम से जमा होने वाले फॉर्म-6 को भी ऑफलाइन प्रक्रिया की तरह दो अलग-अलग हिस्सों में बांटने का निर्णय किया गया। इनमें वैधानिक प्रावधानों के तहत निर्धारित फॉर्म-6 और एसआईआर से जुड़ा घोषणा पत्र शामिल हैं।

इस बीच, आयोग ने मंगलवार को एक और महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया था। इसके मुताबिक, जिन लोगों का नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन एसआईआर के बाद जारी होने वाली मसौदा मतदाता सूची में उनका नाम नहीं मिलता है, वे भी नाम दोबारा शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 भर सकते हैं।

आयोग का यह बयान उन मतदाताओं की आशंकाओं के बीच आया है, जिन्हें डर था कि पहले से पंजीकृत होने के बावजूद फॉर्म-6 जमा करने पर उन पर गलत जानकारी देने का आरोप लग सकता है और निर्वाचन कानून के तहत कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इस स्पष्टीकरण से आयोग ने स्पष्ट किया है कि मसौदा मतदाता सूची में नाम छूटने की स्थिति में फॉर्म-6 के जरिए नाम शामिल कराने का विकल्प उपलब्ध है।

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