Sports: चेन्नई ओपन में माया राजेश्वरन का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 14 साल बाद WTA क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय

Sports: भारतीय टेनिस की उभरती खिलाड़ी माया राजेश्वरन रेवती ने चेन्नई ओपन में शानदार प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया है। हालांकि, 17 वर्षीय माया इस बड़ी उपलब्धि को लेकर उत्साहित होने के बावजूद अपना ध्यान खेल और प्रदर्शन में सुधार पर ही बनाए रखना चाहती हैं। उनका मानना है कि सफलता के साथ मिलने वाली पहचान अच्छी बात है, लेकिन खिलाड़ी के लिए लगातार मेहनत करना सबसे ज्यादा जरूरी है।

माया ने बुधवार को चेन्नई ओपन के एकल मुकाबले के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। इसके साथ ही वह 2012 के बाद WTA टूर स्तर के किसी एकल टूर्नामेंट के अंतिम आठ में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला टेनिस खिलाड़ी बन गईं। उनसे पहले यह उपलब्धि दिग्गज खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने हासिल की थी। सानिया फरवरी 2012 में पटाया ओपन के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थीं।

विश्व रैंकिंग में 669वें स्थान पर मौजूद माया ने दूसरे दौर में पोलैंड की क्वालीफायर वेरोनिका फाल्कोव्स्का को सीधे सेटों में 6-4, 6-3 से हराया। फाल्कोव्स्का की विश्व रैंकिंग 277 है। चेन्नई ओपन के पिछले दो संस्करणों में कोई भी भारतीय खिलाड़ी दूसरे दौर से आगे नहीं बढ़ पाई थी। ऐसे में माया की यह जीत और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कम उम्र में इतनी बड़ी सफलता हासिल करने के बाद माया को मिल रही पहचान और प्रशंसा उनके लिए खास है। उनका कहना है कि भारतीय महिला टेनिस को आगे बढ़ाने के लिए नए चेहरों और आदर्श खिलाड़ियों की जरूरत है। ऐसे में युवा खिलाड़ियों को मिलने वाला प्रोत्साहन काफी मायने रखता है।

क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के बाद माया ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के करियर में पहचान और समर्थन की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में किसी खिलाड़ी को पहचान मिलना बेहद सुखद अनुभव है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आखिरकार सब कुछ मैदान पर किए गए प्रदर्शन पर निर्भर करता है। खिलाड़ी को अच्छा खेलना चाहिए, अपनी गलतियों से सीखना चाहिए और तय लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

माया ने स्वीकार किया कि फाल्कोव्स्का के खिलाफ मुकाबले में उनका प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ स्तर का नहीं था। विशेष रूप से उनकी सर्विस में वह धार नहीं दिखी जिसकी उन्हें उम्मीद थी। प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी के आक्रामक रिटर्न ने भी उनके सामने चुनौती खड़ी की। इसके बावजूद उन्होंने मुकाबले में वापसी के रास्ते तलाशे और जीत दर्ज की।

माया के मुताबिक, पिछले दौर की तुलना में इस मैच में उनका खेल थोड़ा कमजोर रहा, लेकिन जीत हासिल करना उनके लिए संतोषजनक रहा। उन्होंने बताया कि फाल्कोव्स्का लगातार आक्रामक शॉट खेल रही थीं। ऐसे में उन्होंने संयम बनाए रखते हुए सही दिशा में शॉट लगाने और ज्यादा से ज्यादा मौकों को अंक में बदलने की रणनीति अपनाई।

माया की इस सफलता के पीछे इस साल की गई लगातार मेहनत भी शामिल है। वह जूनियर टेनिस के साथ पेशेवर प्रतियोगिताओं में भी अपनी जगह मजबूत कर रही हैं। इस साल उनका लक्ष्य कम से कम एक पेशेवर खिताब जीतना था, जिसे उन्होंने नाइजीरिया के लागोस में ITF टूर्नामेंट जीतकर पूरा कर लिया।

उन्होंने लागोस में मिली सफलता को अपने करियर की सकारात्मक शुरुआत बताया। अब उनका इरादा ज्यादा से ज्यादा मुकाबले खेलने और साल का अंत अच्छे प्रदर्शन के साथ करने का है। माया फिलहाल रैंकिंग में सुधार या बड़ी उपलब्धियों का दबाव लेने के बजाय अपने खेल की कमियों को दूर करने पर ध्यान देना चाहती हैं।

जूनियर ग्रैंडस्लैम प्रतियोगिताओं में मिले अनुभव और उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं आने के सवाल पर माया ने कहा कि खेल में जीत और हार दोनों से सीखना चाहिए। उनके मुताबिक, बीती असफलताओं पर अटके रहने के बजाय उनसे सबक लेकर आगे बढ़ना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *