Economy: निजी निवेश तक सरकार संभालेगी मोर्चा, बोली वित्त मंत्री

Economy:  केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि जब तक निजी क्षेत्र की ओर से निवेश में तेजी नहीं आती, तब तक सरकार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के माध्यम से देश की आर्थिक वृद्धि को मजबूती देती रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन कायम रखते हुए बुनियादी ढांचे और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश जारी रखेगी।

मुंबई में एचएसबीसी की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय केंद्र सरकार की आर्थिक विकास रणनीति का अहम आधार है। निजी कंपनियों की ओर से नई उत्पादन क्षमता विकसित करने और मौजूदा क्षमताओं के विस्तार के लिए निवेश शुरू होने तक सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

सीतारमण के मुताबिक, बीते चार से पांच वर्षों में सरकार की इस रणनीति के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इससे अर्थव्यवस्था को गति मिली है और विकास को मजबूती हासिल हुई है। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार आगे भी इसी दिशा में प्रयास जारी रखेगी, ताकि भारत की आर्थिक प्रगति की रफ्तार प्रभावित न हो।

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार के लिए राजकोषीय अनुशासन सर्वोपरि है। आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के साथ खर्च का प्रबंधन सावधानीपूर्वक करना जरूरी है। इसके लिए सरकार को विवेकपूर्ण वित्तीय फैसलों के साथ नए विकल्पों पर भी विचार करना होगा।

देश की आर्थिक स्थिति पर भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि भारत की विकास दर सात प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है और अर्थव्यवस्था में कमजोरी के कोई संकेत नहीं हैं। जमीनी स्तर पर आर्थिक गतिविधियां मजबूत हैं। जीएसटी राजस्व में लगातार मजबूती और भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की बेहतर स्थिति भी अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार को प्रदर्शित करती है।

सीतारमण ने देश के आर्थिक प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए कहा कि भारत में आशावादी सोच और आत्मविश्वास से भरी बातचीत को बढ़ावा देने की जरूरत है। उनके अनुसार, कभी-कभी विशेषज्ञ भी अर्थव्यवस्था को लेकर आशंकाएं जाहिर करते हैं, लेकिन अब देश के प्रति नजरिये में सकारात्मक बदलाव लाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारत को अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखना चाहिए और देश की उपलब्धियों को लेकर सकारात्मक संदेश देना चाहिए। वित्त मंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान जैसी वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि इसके बावजूद भारत में ईंधन की आपूर्ति निर्धारित समय पर सुनिश्चित की जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान सीतारमण ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि युवाओं को आधुनिक तकनीक का व्यावहारिक ज्ञान देने के लिए जिला स्तर पर कौशल विकास की सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए।

उन्होंने मौजूदा तकनीकी शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने वाले कई विद्यार्थियों के कौशल भी उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) का प्रदर्शन भी अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंच पाया है।

वित्त मंत्री ने एआई और सूचना प्रौद्योगिकी के साथ-साथ हार्डवेयर से संबंधित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयोगशालाएं स्थापित करने की जरूरत बताई। उन्होंने आईटीआई के आधुनिकीकरण के लिए दो साल पहले बजट में घोषित पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना को लागू करने वाले राज्यों को अच्छे परिणाम मिले हैं।

सीतारमण ने बताया कि असम और ओडिशा ने सिंगापुर सरकार के सहयोग से प्रमाणित कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन कार्यक्रमों के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले एक बैच को सिंगापुर भेजा भी जा चुका है। उन्होंने कहा कि उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करना रोजगार के अवसर बढ़ाने और भारत की तकनीकी क्षमता मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी है।

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