UPI Payments: केंद्र सरकार ने साफ कहा कि ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ में बदलाव करने वाले बिल के पास होने के बाद, ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगने की आशंका गलत है। सरकार ने कहा कि ग्राहक और छोटे व्यापारी मुफ्त यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) सेवाओं का फायदा उठाते रहेंगे, हालांकि, जब भी चार्ज लागू किए जाएंगे, तो व्यापारियों के लिए मामूली मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा।
वित्त मंत्रालय ने कहा, “ये शुल्क केवल कुछ खास तरह के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर, एक निश्चित सीमा से ऊपर, मामूली दर पर लागू होंगे, जो डेबिट या क्रेडिट कार्ड के MDR से बहुत कम होंगे।” ये बयान लोकसभा द्वारा ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ में बदलाव करने वाला बिल पास करने के दो दिन बाद आया है। ये बिल सरकार को बैंकों और दूसरे सर्विस प्रोवाइडर्स को यूपीआई और दूसरे नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों से होने वाले भुगतान पर शुल्क लगाने की इजाजत देने का अधिकार देता है।
बयान में कहा गया, “एक बार जब संसद ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ पास कर देगी, जिसमें ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ की धारा 10A में बदलाव का प्रस्ताव है, तो एनपीसीआई की अध्यक्षता वाली ‘यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी’ MDR के बारे में फैसला करेगी, अगर कोई MDR लागू किया जाता है तो।”
बयान में कहा गया कि ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट’ (PSS एक्ट) में हालिया बदलाव ने बहस छेड़ दी है, क्योंकि कुछ लोग इसे आम यूजर्स पर चार्ज लगाने की कोशिश के तौर पर गलत समझ रहे हैं। दरअसल ये बदलाव यूपीआई की लंबे समय तक चलने की क्षमता, तकनीकी तरक्की और उभरते जोखिमों से निपटने की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए जरूरी प्रावधान है।
इसकी वजह बताते हुए कहा गया कि ट्रांजैक्शन की तेजी से बढ़ती संख्या को देखते हुए, सिस्टम को साइबर सिक्योरिटी, धोखाधड़ी रोकने और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े और लगातार अपग्रेड की जरूरत है। बयान में आगे कहा गया कि बाजार के विस्तार और खुद से चलने की क्षमता (सेल्फ-सस्टेनेबिलिटी) के लिए ये जरूरी था।
बयान के अनुसार, ज्यादा कंपनियों को अपना कामकाज बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करके कॉम्पिटिशन बढ़ाना जरूरी है, जिसके लिए खुद से चलने वाला रेवेन्यू मॉडल चाहिए। बयान में कहा गया कि विकास के अगले चरण के लिए सिर्फ सब्सिडी पर निर्भर रहना सही नहीं है, और UPI को मजबूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार रखने के लिए संतुलित फ्रेमवर्क की जरूरत है।
बाहरी दबावों की वजह से नीतियों में बदलाव जैसी बातों पर चिंताओं का जवाब देते हुए कहा गया कि ये बेबुनियाद, पूरी तरह से गलत और गुमराह करने वाला है। सरकार ने कहा कि अगर बाहरी दबाव कोई वजह होती, तो सरकार 2016 में UPI शुरू नहीं करती या जनवरी 2020 से इसे व्यापारियों और आम लोगों के लिए मुफ्त नहीं बनाती और इसे दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम इंटरऑपरेबल पेमेंट सिस्टम नहीं बनाती।
सरकार ने कहा कि इसलिए इस बदलाव को उस बड़े मकसद के नजरिए से देखा जाना चाहिए जिसके तहत भारत का डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर टिकाऊ, प्रतिस्पर्धी, इनोवेटिव और देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बना रहे। सरकार ने आगे कहा कि UPI भारत का इनोवेशन है और सरकार इसे नागरिकों के लिए मुफ्त बनाए रखने के साथ-साथ आने वाले दशकों तक इसके टिकाऊपन को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार ने कहा कि भारत अब डिजिटल पेमेंट में बढ़ोतरी के अगले दौर की दहलीज पर खड़ा है। UPI को ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में और फैलाने और प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए UPI इकोसिस्टम का खुद टिकाऊ और किफायती होना जरूरी है। सरकार ने कहा कि PSS एक्ट में किया गया बदलाव एक दूरदर्शी कदम है, ताकि ये पक्का किया जा सके कि UPI एक सुरक्षित, किफायती, समावेशी और विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त पेमेंट सिस्टम के तौर पर आगे बढ़ता रहे।
सरकार ने कहा कि 2016-17 में लॉन्च होने के बाद से, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को दुनिया के सबसे समावेशी और गतिशील पेमेंट इकोसिस्टम में से एक में बदल दिया है। सरकार ने कहा कि रियल-टाइम, इंटरऑपरेबल पेमेंट के तौर पर शुरू हुआ साहसिक प्रयोग अब एक ग्लोबल बेंचमार्क बन गया है, जो हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है और रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है।
सरकार ने कहा कि आज UPI दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन गया है, जिसने अकेले जुलाई 2026 में 29.9 लाख करोड़ रुपये के 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए। UPI अब 11 विदेशी देशों में भी चालू है और कई देशों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है। UPI भारतीयों द्वारा भारतीयों के लिए बनाया गया एक राष्ट्रीय गौरव है। सरकार ने एक दशक से इसे बढ़ावा दिया है। इसके लिए फंड दिया है और इसे आगे बढ़ाया है और आगे भी ऐसा करती रहेगी। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे केवल वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक और एनपीसीआई की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और बिना पुष्टि किए मैसेज आगे न बढ़ाएं।