Gujarat: स्ट्रोक और पार्किंसंस के मरीजों के इलाज में अब AI टेक्नोलॉजी नई उम्मीद बन रही है। सौराष्ट्र के मोरबी में IIT गांधीनगर और आर्यतेज इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़िज़ियोथेरेपी के सहयोग से AI-बेस्ड आधुनिक इक्विपमेंट के ज़रिए मरीज़ों की जांच और इलाज किया जा रहा है। ख़ास बात ये है कि मरीजों की ज़रूरत के मुताबिक इक्विपमेंट डेवलप करने के लिए IIT गांधीनगर की टीम साल में दो से तीन बार मोरबी में ख़ास ड्राइव करती है।
वर्ष 2022 में IIT गांधीनगर के दौरे के दौरान आर्यतेज इंस्टीट्यूट की टीम को स्ट्रोक और पार्किंसंस के मरीज़ों के लिए विकसित किए गए फिजियोथेरेपी इक्विपमेंट की जानकारी मिली। इसके बाद दोनों संस्थाओं के बीच कोलैबोरेशन शुरू हुआ। आम दिनों में सेंटर पर जहां क़रीब 25 मरीज़ इलाज के लिए आते हैं, वहीं एक सप्ताह की ख़ास ड्राइव के दौरान 80 से ज़्यादा मरीज़ इलाज के लिए पहुंचते हैं।
IIT गांधीनगर की विकसित की गई टेक्नोलॉजी में मरीज़ के जूते के अंदर एक स्मार्ट इनसोल लगाया जाता है, जिसमें कुछ ख़ास जगहों पर प्रेशर सेंसर्स लगे होते हैं। ये सेंसर मरीज़ के पैर के दबाव और चलने के तरीके को लगातार रिकॉर्ड करते हैं। AI इस डेटा का विश्लेषण कर यह पहचानता है कि मरीज़ की चाल में ऐसे बदलाव तो नहीं आ रहे, जिनसे अगले पल पैर फ्रीज होने की आशंका हो। ऐसे संकेत मिलते ही सिस्टम तुरंत एक संकेत देता है, जिससे मरीज़ को संभल कर चलने में मदद मिलती है।
IIT गांधीनगर में विकसित ये इक्विपमेंट अब बाज़ार में भी उपलब्ध हैं। ऐसे में रिसर्च और AI टेक्नोलॉजी का सीधा फ़ायदा मरीज़ों तक पहुंच रहा है। मोरबी में शुरू हुई ये पहल स्ट्रोक और पार्किंसंस के मरीज़ों के लिए ज़्यादा आधुनिक और बेहतर फिजियोथेरेपी इलाज की दिशा में अहम कदम साबित हो रही है।