Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्वास्थ्य अधिकारियों ने H1N1 इन्फ्लूएंजा से निपटने के लिए तैयारी तेज कर दी है। स्वाइन फ्लू के संभावित मामलों से निपटने के लिए आइसोलेशन वार्ड से लेकर डायग्नोस्टिक सेंटर और दवा के स्टॉक तक, हर तरह की तैयारी की गई है। जिले के सरकारी अस्पतालों में संदिग्ध मामलों के लिए अलग से बेड तय किए गए हैं।
सीएमओ डॉ. राजेश कुमार झा ने बताया कि “जहां भी ज़रूरत है, उन अस्पतालों में दवाइयां और जांच की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। वर्तमान में अभी हमारे पास BRD (बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज) और AIIMS के साथ-साथ ज़िला अस्पतालों में भी जांच की सुविधा है। वहां सैंपल लिए जाते हैं और आगे की जांच के लिए BRD भेजे जाते हैं। ज़िला अस्पताल में 14 बेड का आइसोलेशन वार्ड और BRD में 20 बेड का बीआरडी में बनाया गया है। AIIMS में भी एक आइसोलेशन वार्ड बनाया जा रहा है”
H1N1 इन्फ्लूएंजा, अत्यधिक संक्रामक है। ये भीड़भाड़ और हवा की सही निकासी ना होने वाली जगहों पर तेजी से फैल सकता है। इसलिए डॉक्टरों को सलाह दी गई है कि वो मरीजों का इलाज करते वक्त मास्क पहनने जैसी सावधानियां बरतें और भीड़भाड़ से बचें।
जिला अस्पताल के डॉ. बी.के. सुमन, चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि हमने अस्पतालों को नोटिस जारी किए हैं। बीमार मरीज़ों का इलाज करने वाले डॉक्टरों को सलाह दी गई है कि वे मास्क पहनें और यह पक्का करें कि मरीज़ों के बीच भीड़ न हो। यह एक वायरल बीमारी है जो छींकने और खांसने से फैलती है। इसके मुख्य लक्षणों में तेज़ बुखार, नाक बहना, खांसी, ज़ुकाम, सिरदर्द और बदन दर्द शामिल हैं। हम इन लक्षणों वाले मरीज़ों की पहचान करते हैं और फिर जांच करते हैं। अगर किसी मरीज़ की H1 वायरस संक्रमण की जांच नेगेटिव आती है, तो उन्हें साधारण दवाइयां दी जाती हैं और आराम करने के लिए घर भेज दिया जाता है, साथ ही एक हफ़्ते बाद जांच के लिए बुलाते हैं”
हालांकि गोरखपुर में H1N1 के मामले चिंताजनक नहीं हैं, फिर भी डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि ऐसे लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है।