Delhi Pollution: सर्दियों का मौसम शुरू होते ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने लगी है। हवा की गुणवत्ता खराब होने के साथ ही प्रशासन ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई प्रतिबंधात्मक उपाय लागू किए हैं। शहर के 54 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 18 ने रविवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को ‘खराब’, जबकि 25 केंद्रों ने इसे ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया।
प्रदूषण की स्थिति को और गंभीर होने से रोकने के लिए प्रशासन ने वाहनों, निर्माण गतिविधियों और कार्यालयों से जुड़े कई नए नियम लागू किए हैं। इनके तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-VI मानक से नीचे के वाहनों को 31 जनवरी तक राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
इसके अलावा, धूल फैलने की आशंका को देखते हुए सभी प्रकार की बाहरी निर्माण और तोड़-फोड़ गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि, सार्वजनिक हित से जुड़ी कुछ आवश्यक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को इस पाबंदी से छूट दी गई है। वहीं, 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा, जिसमें निर्धारित शर्तों के तहत कुछ छूट दी जा सकती है।
वाहनों की आवाजाही कम करने के उद्देश्य से दिल्ली के सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क को भी 28 फरवरी तक दो गुना कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकारी और निजी कार्यालयों के लिए एक नवंबर से 31 जनवरी तक उपस्थिति संबंधी नए नियम लागू किए गए हैं। अब कार्यालयों में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारी ही काम करेंगे, जबकि शेष कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करना होगा। आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि केवल वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने से दिल्ली की प्रदूषण समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। उनका कहना है कि प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर भी प्रभावी नियंत्रण और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। पर्यावरणविदों ने सालभर पटाखों के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई है। उनका मानना है कि प्रतिबंधों के बावजूद पटाखे जलाने की घटनाएं जारी रहना नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
इस बीच, बीएस-VI मानकों से पुराने वाहनों की एंट्री पर रोक लागू होने के बाद दिल्ली की कई सीमाओं पर वाहनों की लंबी कतारें और ट्रैफिक जाम देखने को मिले। प्रतिबंधों के पहले दिन यानी शीतकालीन कार्य योजना के शुरुआती चरण में प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कुल 68.4 लाख रुपये का जुर्माना और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क लगाया।
इस दौरान प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) से जुड़े नियमों की जांच के लिए करीब 15 हजार वाहनों का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों का लक्ष्य वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल और सड़कों पर लगने वाले जाम को नियंत्रित करना है। प्रशासन की ओर से लागू किए गए ये सभी उपाय एक नवंबर से 28 फरवरी के बीच अलग-अलग निर्धारित समयावधियों में प्रभावी रहेंगे। इनका उद्देश्य सर्दियों के दौरान दिल्ली में वायु प्रदूषण के स्तर को बढ़ने से रोकना और लोगों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना है।