Roorkee: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रुड़की के हाइड्रोलॉजी विभाग के शोधकर्ता मौसम में हो रहे बदलावों का अध्ययन कर रहे हैं। वे खास तौर पर बहुत ज्यादा बारिश, सूखा और लू (हीटवेव) जैसी घटनाओं के रुझानों पर शोध कर रहे हैं।
शोधकर्ताओं का मकसद यह समझना है कि पूरे भारत में मौसम के पैटर्न कैसे बदल रहे हैं। शुरुआती शोध में पता चला है कि मध्य भारत में बहुत ज्यादा बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे बाढ़ का खतरा भी बढ़ रहा है। वहीं, कुछ इलाकों में लंबे समय तक सूखे की स्थिति देखने को मिल रही है।
बारिश के समय और तीव्रता में हो रहे बदलाव खेती, जल-संसाधन प्रबंधन, बांधों और हाइड्रोलिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बढ़ती चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। संस्थान की वेधशाला में छात्र मौसम की अलग-अलग गतिविधियों पर नजर रखते हैं। इसके लिए वे खास उपकरणों और मौसम विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों का इस्तेमाल करते हैं।
शोधकर्ता इस बात की भी स्टडी कर रहे हैं कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस में हो रहे बदलावों का हिमालय के मौसम पर क्या असर पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर अब सिर्फ सर्दियों की बारिश और बर्फबारी तक सीमित नहीं है। इनका असर प्री-मानसून बारिश पर भी पड़ रहा है।इस बदलाव से अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर खेती पर भी पड़ सकता है। साथ ही, पहाड़ी इलाकों से आने वाले पानी पर निर्भर निचले क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है।