Nepal Floods: नेपाल में फ्लैश फ्लड से 175 लोगों की मौत, 28 देशों के 476 विदेशी लापता, बचाव अभियान तेज

Nepal Floods:  नेपाल में भोते कोशी नदी में आई शक्तिशाली बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर तबाही मची है। अचानक आई फ्लैश फ्लड में अब तक 175 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि स्थानीय लोगों और पर्यटकों समेत बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। नेपाल दूतावास के सूत्रों के अनुसार, 28 देशों के 476 लोगों के लापता होने की सूचना मिली है। हालांकि, बचाव एवं राहत अभियान जारी रहने के कारण इन आंकड़ों का सत्यापन अभी किया जा रहा है।

बाढ़ से घरों, सड़कों, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थिति को देखते हुए नेपाल की सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं बचाव, लोगों को सुरक्षित निकालने, चिकित्सा सहायता और राहत कार्य तेज कर दिए गए हैं। अधिकारियों की ओर से नदी तंत्र और निचले इलाकों में बाढ़ के खतरे पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।

नेपाल दूतावास के सूत्रों ने बताया, “अब तक 175 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई लोग, स्थानीय निवासी और पर्यटक दोनों, अभी भी लापता हैं। उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार, 28 देशों के 476 लोगों के लापता होने की सूचना है। खोज एवं बचाव अभियान जारी रहने के कारण इन आंकड़ों का सत्यापन किया जा रहा है।”

दूतावास के अनुसार, फिलहाल सरकार की प्राथमिकता लोगों की जान बचाने और प्रभावित इलाकों में खोज एवं बचाव, निकासी तथा राहत कार्यों में सहायता करना है। बाढ़ से हुए व्यापक नुकसान का आकलन किया जा रहा है और जमीन पर उभरती जरूरतों के आधार पर सहायता से जुड़ी विशेष आवश्यकताओं की जानकारी आधिकारिक माध्यमों से साझा की जाएगी।

रसुवा में बढ़ा मौत का आंकड़ा-

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, रसुवा जिले में प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ रही है। शवों की पहचान की प्रक्रिया भी जारी है। क्षेत्र में तैनात नेपाल सेना के 44 जवान, नेपाल पुलिस के 28 जवान और सशस्त्र पुलिस बल (APF) के 13 जवान भी संपर्क से बाहर हैं और लापता बताए जा रहे हैं।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, 579 यात्री अभी भी लापता हैं। इनमें 466 विदेशी नागरिक और 113 नेपाली नागरिक शामिल हैं। वहीं, रसुवा के टिमुरे से 123 लोगों को हवाई मार्ग से सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 94 नेपाली और 29 विदेशी नागरिक हैं।

ग्लेशियर या बर्फीली चट्टान के टूटने से आई बाढ़-

यह आपदा ल्हेंदे खोला में मलबे के साथ आई भीषण बाढ़ के कारण हुई। बताया जा रहा है कि रसुवागढ़ी सीमा चौकी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में ग्लेशियर या बर्फीली चट्टान के टूटने के बाद भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की ओर आया।

तिब्बत की ओर से आया यह तेज बहाव भोते कोशी नदी में समा गया और रसुवागढ़ी, टिमुरे तथा स्याफ्रुबेसी इलाकों को बुरी तरह प्रभावित करता हुआ त्रिशूली नदी में जा मिला। इसके चलते रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जिलों के नदी किनारे के क्षेत्रों में भी व्यापक नुकसान हुआ। बाढ़ से 35 मोटरेबल पुल, 45 झूला पुल और करीब 40 किलोमीटर पक्की सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। नुकसान का विस्तृत आकलन अभी जारी है।

सेना और पुलिस ने रातभर चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन-

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, खोज, बचाव और राहत अभियान को बड़े पैमाने पर बढ़ाया गया है। नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने निजी क्षेत्र के हेलीकॉप्टरों और सैन्य हेलीकॉप्टरों की मदद से रातभर अभियान चलाकर टिमुरे और स्याफ्रुबेसी में फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया। जिला अस्पतालों से लेकर काठमांडू के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों तक मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं। घायलों के इलाज के साथ-साथ नेपाल सेना की बैरकों में अस्थायी आश्रय, भोजन, स्वच्छ पानी और दवाओं की व्यवस्था की गई है।

भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ-

नेपाल में आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच भारत ने भी तत्काल मानवीय सहायता उपलब्ध कराई है। नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री खड्का राज पौडेल को 10 टन मानवीय सहायता सामग्री सौंपी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बातचीत कर आपदा में हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसी के साथ मजबूती से खड़ा है और हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी बताया कि भारत की मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) सामग्री और चिकित्सा आपूर्ति काठमांडू पहुंच चुकी है। दोनों देशों के बीच राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर समन्वय जारी है।

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