Vande Mataram: कांग्रेस खुद को संसद और संविधान से ऊपर मानती है, ‘वंदे मातरम्’ पर बोले अनुराग ठाकुर

Vande Mataram:  कांग्रेस कार्य समिति ने ‘वंदे मातरम्’ के दो ही पद गाने का फैसला किया। इसके तहत अब पार्टी के सभी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के सिर्फ दो पद ही गाए जाएंगे। कांग्रेस का ये फैसला तब आया जब बीजेपी ने उसके नेताओं पर पार्टी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण न गाकर उसका अपमान करने का आरोप लगाया था।

सीडब्ल्यूसी की चार घंटे से ज्यादा चली बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी का रुख बिल्कुल साफ है और वे 1937 में अपनी शीर्ष नेताओं के फैसले के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा, “इसमें कोई भ्रम नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कल गोवा में भी इस बारे में साफ कहा था। सीडब्ल्यूसी की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई। हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। 1937 में जो प्रस्ताव पारित हुआ था, उस समय पार्टी के शीर्ष नेता महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल मौजूद थे।”

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “उस समय हमारे नेताओं ने जो फैसला लिया था, हम उसी फैसले पर कायम हैं। हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है और कांग्रेस के कार्यकर्ता भी उसी फैसले के अनुसार काम करेंगे। यही हमारा निर्णय है।” ये पूछे जाने पर कि क्या पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो पद ही गाए जाएंगे, उन्होंने कहा, “हां, पहले दो पद।”

वेणुगोपाल ने कहा कि वंदे मातरम् और राष्ट्रगान का गायन कांग्रेस के लिए भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है, जबकि बीजेपी के लिए ये एक राजनीतिक मुद्दा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी द्वारा पूरा राष्ट्रगीत गाने पर जताई गई आपत्ति की बीजेपी की आलोचना सिर्फ ध्यान भटकाने की चाल थी। उन्होंने कहा, “ये पेपर लीक और ‘चंदा चोरी’ जैसे राष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बीजेपी का एक तरीका है।”

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 28 अक्टूबर 1937 को रवींद्रनाथ टैगोर के सुझाव पर महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और मौलाना आजाद की मौजूदगी में सीडब्ल्यूसी की बैठक में ‘वंदे मातरम्’ पर एक प्रस्ताव पारित किया गया था। उन्होंने कहा, “सीडब्ल्यूसी की आज की बैठक में उस प्रस्ताव पर चर्चा हुई… कांग्रेस अध्यक्ष ने पहले के प्रस्ताव का एक हिस्सा भी पढ़कर सुनाया। इस मुद्दे पर कोई विवाद नहीं है। इस मुद्दे को जानबूझकर तूल दिया जा रहा है, जबकि आज के असली मुद्दे युवा, परीक्षाएं, ‘चंदा चोरी’ और विदेश नीति की विफलता हैं।”

रमेश ने कहा, “शुरू से ही हमारा रुख साफ रहा है कि 28 अक्टूबर, 1937 को हमारे पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि राष्ट्रगान ‘जन गण मन…’ होगा और वंदे मातरम् हमारा राष्ट्रगीत होगा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *