Raghav Chadha: राघव चड्ढा ने परीक्षा लीक मामलों को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना

Raghav Chadha: संसद में परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 के पारित होने के बाद, भाजपा सांसद राघव चड्ढा ने इस विधेयक को भारत का पहला “पेपर लीक विरोधी” ढांचा बताया। सदन में संबोधित करते हुए, चड्ढा ने कांग्रेस पर छात्रों के भविष्य के प्रति “ऐतिहासिक रूप से जवाबदेही की कमी” का आरोप लगाते हुए तीखा हमला किया।

चड्ढा ने X पर लिखा कि “मैंने हर उस युवा भारतीय की ओर से आवाज़ उठाई है जो मानता है कि ईमानदारी से किए गए प्रयास को ईमानदारी से अवसर मिलना चाहिए। सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 के पारित होने के साथ, भारत का पहला पेपर लीक विरोधी ढांचा लागू हो गया है। छात्रों ने अपनी बात रखी। सरकार ने सुनी, कार्रवाई हुई। व्यवस्था में बदलाव आया।”

उन्होंने आगे कहा कि परीक्षार्थियों पर इसका भावनात्मक प्रभाव पड़ता है, “क्योंकि पेपर लीक होने से केवल परीक्षा ही प्रभावित नहीं होती। यह एक ही पल में वर्षों की तैयारी को बर्बाद कर सकता है। हर छात्र एक ऐसी परीक्षा प्रणाली का हकदार है जहां कड़ी मेहनत और योग्यता, न कि लीक हुआ पेपर, परिणाम तय करे।”

संसद में अपने संबोधन के दौरान, चड्ढा ने कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की हालिया और पिछली खामियों का हवाला देते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। मौजूदा सरकार को निशाना बनाते हुए उन्होंने कहा, “कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। जनवरी 2026 में एसएसएलसी परीक्षा हुई थी। उस सरकार के शासनकाल में परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश में इसी तरह की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग की भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र भी लीक हो गया था।  “सबसे दुखद बात यह है कि 2016 में कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के दौरान प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज के 12वीं कक्षा के रसायन विज्ञान के प्रश्नपत्र लीक हो गए थे। यह सिर्फ कक्षा की परीक्षा नहीं थी,  यह राज्य बोर्ड की परीक्षा थी। लीक का पता चलने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई। 20 दिन बाद पुनर्परीक्षा आयोजित की गई। उस पुनर्परीक्षा का प्रश्नपत्र भी लीक हो गया! सुबह 3:30 बजे वह प्रश्नपत्र व्हाट्सएप पर प्रसारित हो रहा था, और पुनर्परीक्षा को भी रद्द करना पड़ा,” ।

उन्होंने आगे कहा, “जब मंत्री जी से पूछा गया कि अपने सहायक के कार्यों के लिए नैतिक और प्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी होने के बावजूद वे इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि इस्तीफे का तो सवाल ही नहीं उठता, और दावा किया कि यह उनके सहायक जी का ‘निजी मामला’ और ‘निजी जीवन’ है। कमाल है पद, पदनाम और पहुँच सब सरकार द्वारा प्रदान की गई थी, लेकिन जब गिरफ्तारी की बात आई, तो अचानक यह ‘निजी जीवन’ का मामला बन गया।”

चड्ढा ने सदन को बताया कि वर्तमान राजनीतिक स्थिति की विडंबना की ओर इशारा करते हुए कहा, “और विडंबना देखिए आज 2026 में, कर्नाटक में फिर से कांग्रेस की सरकार है, और डॉ. शरण पाटिल फिर से मंत्री हैं – विशेष रूप से, उसी चिकित्सा शिक्षा विभाग के मंत्री। यही है उनकी जवाबदेही का पैमाना।”
चढ़ा ने दावा किया कि 2004 से 2014 के बीच की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता की रक्षा करने में विफल रही।

उन्होंने कहा, “यूपीए सरकार के 2004 से 2014 तक के कार्यकाल के दौरान, पेपर लीक के दर्जनों दस्तावेजी उदाहरण सामने आए। इनमें 2006 में एम्स पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम, 2009 में रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड एग्जाम, 2011 में ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम और 2013 में एसएससी कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल एग्जाम शामिल हैं।

 

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