Cyber Crime: जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है, साइबर अपराधी लोगों के भरोसे का फायदा उठाने और अनजान लोगों को शिकार बनाने के लिए ज्यादा चालाकी भरे तरीके अपना रहे हैं। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर या I4C ने एक एडवांस्ड “बॉस स्कैम” के बारे में चेतावनी दी है। इसमें अपराधी कॉर्पोरेट लीडरों के डिवाइस और मैसेजिंग अकाउंट्स को हैक करके उन्हें निशाना बनाते हैं और कर्मचारियों को धोखा देकर उनसे फर्जी ट्रांसफर करवाते हैं।
स्कैमर्स ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए आरबीआई अधिकारी बनकर सीनियर एग्जीक्यूटिव्स पर दबाव डालते हैं। वे नियमों के उल्लंघन और जरूरी मांगों का बहाना बनाकर उनके अकाउंट्स का कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते हैं। यह धोखाधड़ी अक्सर जिप फाइलों में छिपे मैलवेयर से शुरू होती है, जिसका इस्तेमाल हैकर्स सीनियर कॉर्पोरेट लीडरों के डिवाइस को संक्रमित करने के लिए करते हैं।
एआई की वजह से धोखाधड़ी का पता लगाना मुश्किल होता जा रहा है, इसलिए साइबर एक्सपर्ट्स कंपनियों को सलाह दे रहे हैं कि वे किसी भी वित्तीय लेन-देन या फंड ट्रांसफर के निर्देश को कंपनी के तय नंबर या सीधे अधिकारी को कॉल करके या मिलकर पुष्टि करें और “जीरो ट्रस्ट” अप्रोच अपनाएं। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने भी संस्थाओं को सलाह दी है कि वे वेरिफिकेशन प्रोसेस को मजबूत करें और सिर्फ व्हाट्सएप मैसेज या ईमेल के आधार पर तुरंत पेमेंट या अकाउंट में बदलाव को मंजूरी न दें।
साइबर एक्सपर्ट ने बताया, “पहले आपकी प्रोफाइलिंग करते हैं, किसी तरह से कोशिश करते हैं कि आपका व्हाट्सएप हैक हो जाए या आपके मोबाइल फोन में कोई मैलवेयर भेजते हैं कि आप क्लिक कर लेते हैं अनजाने में और आपका मोबाइल फोन कॉम्प्रोमाइज हो जाता है और उसके बाद क्या करते हैं, आपकी कॉन्टेक्ट लिस्ट में जाकर के किसी भी नंबर से, जिस नंबर से उन्हें मैसेज भेजना है, उसे सीईओ लिख देते हैं, वो मैसेज करता है कि हम एक इंपॉर्टेंट मीटिंग में हैं और इतना पैसा ट्रांसफर करना है, तो सीएफओ या फाइनेंशियल विंग का जो ऑफिसर है, वो ये समझता है कि ये हमारे सीईओ का मैसेज है और वो पैसा उतना ट्रांसफर कर देता है।”