Yamuna: हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से 63 हजार 110 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, इससे दिल्ली में यमुना का स्तर बढ़ गया है, लेकिन सरकार और जानकारों का कहना है कि फिलहाल बाढ़ का कोई खतरा नहीं है। जानकारों ने बताया कि इस मानसून में ऊपरी यमुना बेसिन में सामान्य से कम बारिश हुई है। हालांकि हथिनीकुंड से छोड़ा गया पानी इस साल का सबसे ज्यादा है, फिर भी ये उस स्तर से काफी नीचे है जिससे अमूमन बाढ़ के हालात बनते हैं।
भीम सिंह रावत, साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल “अमूमन जब हथिनीकुंड बैराज पर 75,000 क्यूसेक से डेढ़ लाख क्यूसेक पानी रिलीज होता है प्रति घंटे, तब एक लो फ्लड कहा जाता है उसको और जब डेढ़ लाख क्यूसेक से ढाई लाख क्यूसेक के करीब पानी डिस्चार्ज होता है, तब वो मध्यम स्तर की बाढ़, मीडियम फ्लड बनता है और डिस्चार्जेज जो हैं हथिनीकुंड बैराज से, ढाई लाख क्यूसेक क्रॉस कर जाता है, तब उसको हाई लेवल का फ्लड कहा जाता है।
इस मानसून सीजन में अभी तक यमुना में जो हाइयेस्ट डिस्चार्ज रहा है, वो चार अगस्त, 2026 को रहा है, जो करीब 63,000 क्यूसेक का था। वो स्पेल दिल्ली से चला गया। उसके बाद सात अगस्त को भी 40,000 क्यूसेक के, 45,000 क्यूसेक के कुछ डिस्चार्जेज रहे हैं, जो दिल्ली से अब गुजर रहे हैं।” पर्यावरण कार्यकर्ता 2023 और 2025 में आई बाढ़ को याद करते हैं। उस दौरान लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। वे सरकार से हर हालत के लिए निपटने की तैयारी करने की अपील कर रहे हैं।
पर्यावरण के जानकार भावरीन खंडारी ने बताया कि “घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही की भी कोई गुंजाइश नहीं है। हमने देखा है कि हालात कितने खतरनाक हो सकते हैं। 2023 में यमुना का स्तर लगभग 208 मीटर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। 2025 में भी बाढ़ ने दिल्ली को बुरी तरह प्रभावित किया था। पानी का स्तर फिर से उसी ऊंचाई तक पहुंच गया था। रिकॉर्ड के मुताबिक ये तीसरा सबसे ऊंचा स्तर था, जिससे 12,000 से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे। ये घटना हाल की है और हमें अच्छी तरह याद है। जाहिर है, सरकार हर स्थिति से निपटने की तैयारी कर रही होगी। खासकर इसलिए, क्योंकि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में और बारिश का अनुमान है जो हमेशा बाढ़ का प्रमुख कारण होता है।”
फिलहाल दिल्ली में बाढ़ को लेकर कोई चेतावनी नहीं है। हालांकि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश से ही तय होता है कि राजधानी तक कितना पानी पहुंचेगा। लिहाजा अधिकारी यमुना और ऊपर से छोड़े जाने वाले पानी पर लगातार नजर रखे हुए हैं।