Nautapa: जैसे-जैसे पूरा देश भीषण गर्मी की चपेट में आ रहा है, ‘नौतपा’ ने एक बार फिर पूरे देश में अत्यधिक तापमान के बढ़ते खतरे की ओर ध्यान खींचा है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, जब सूर्य सीधे कर्क रेखा के ऊपर आ जाता है और रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो ‘नौतपा’ शुरू हो जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, ये नौ दिनों तक चलता है।
नौतपा को पारंपरिक रूप से साल के नौ सबसे गर्म दिनों का दौर माना जाता है। ये झुलसा देने वाली गर्मी, खुश्क हवाएं और दिन के समय आसमान छूते तापमान को अपने साथ लाता है। लेकिन पर्यावरणविद चेतावनी देते हैं कि जिस नौतपा को कभी एक छोटा-सा मौसमी दौर माना जाता था, वो धीरे-धीरे एक लंबे समय तक चलने वाले भीषण गर्मी के संकट में बदल गया है।
शहरी इलाकों में, कंक्रीट के बेतहाशा फैलाव, पेड़ों की घटती संख्या और प्राकृतिक पारिस्थितिक सुरक्षा-कवचों के कमजोर पड़ने से गर्मी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे तापमान पारंपरिक ‘नौतपा’ के दौर के बाद भी काफी ज्यादा बना रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी का तनाव सबसे ज्यादा कमजोर समुदायों को प्रभावित करता है, खासकर उन लोगों को जो बाहर काम करते हैं। इनमें सड़क पर सामान बेचने वाले, सफाई कर्मचारी, कूड़ा बीनने वाले और दिहाड़ी मजदूर शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तापमान से निपटने के लिए शहरों को लंबी अवधि की योजना बनानी होगी। इसमें हरियाली को फिर से बहाल करने और हवा के प्राकृतिक रास्तों को बचाने से लेकर… सार्वजनिक जगहों को ठंडा बनाने और ‘हीट एक्शन प्लान’ का विस्तार करने जैसी चीजें शामिल हैं। जलवायु संबंधी अनुमानों से संकेत मिल रहा है कि आने वाले वक्त में गर्मियां और भी ज्यादा गर्म और लंबी होंगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, बहुत ज्यादा गर्मी अब शहरों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।