Vaishno Devi: जम्मू की एक अदालत ने माता वैष्णो देवी मंदिर में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की कथित नकली चांदी चढ़ावे के मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) मुनीश कुमार मनहास की अदालत ने जांच अधिकारी को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड के साथ 29 जुलाई 2026 को अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
यह मामला अधिवक्ता दीपक शर्मा की शिकायत के बाद सामने आया। उन्होंने 9 मई 2026 को पुलिस महानिरीक्षक (क्राइम ब्रांच) और आर्थिक अपराध शाखा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने और विस्तृत जांच की मांग की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई चांदी में मिलावट, अदला-बदली, गबन, रिकॉर्ड में हेरफेर और कैडमियम युक्त सामग्री के इस्तेमाल जैसी गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। अदालत के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। इसमें बताया गया कि शिकायत को पहले क्राइम मुख्यालय श्रीनगर भेजा गया और वहां से मंजूरी मिलने के बाद जोनल पुलिस मुख्यालय, जम्मू को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया गया।
हालांकि, शिकायतकर्ता के वकील ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि केवल शिकायत को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेज देना पर्याप्त कार्रवाई नहीं मानी जा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि आर्थिक अपराध शाखा स्वयं एक अधिसूचित पुलिस थाना है और उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए थी।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि स्टेटस रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि स्टॉक रजिस्टर, इन्वेंट्री रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, परिवहन दस्तावेज, जांच रिपोर्ट, टकसाल से जुड़े रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए गए। माता वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई करीब 20 टन चांदी, जिसकी अनुमानित कीमत 550 करोड़ रुपये बताई गई, को जांच और प्रोसेसिंग के लिए भेजा गया था। जांच के दौरान कथित तौर पर केवल 5 से 6 प्रतिशत सामग्री ही असली चांदी निकली, जबकि बाकी में कैडमियम, लोहे और अन्य निम्न गुणवत्ता वाली धातुएं होने का दावा किया गया।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। शिकायत में यह भी मांग की गई है कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाए कि श्रद्धालुओं को नकली चांदी बेची गई थी या फिर मंदिर में चढ़ाई गई असली चांदी को बाद में किसी चरण में बदल दिया गया, उसमें मिलावट की गई या उसका गबन किया गया।