Musafir Cafe: विक्रांत मैसी, वेदिका पिंटो और महिमा मकवाना की ‘मुसाफिर कैफे’ का ट्रेलर आज 14 जुलाई को रिलीज हो गया है। इसमें तीन मुसाफिरों की अधूरी प्रेम कहानी की झलक देखने को मिली है, यह सीरीज इसी महीने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी।
ट्रेलर-
चंदर और सुधा की मुलाकात से शुरुआत
ट्रेलर की शुरुआत लाइब्रेरी के एक सीन से होती है, जहां चंदर (विक्रांत मैसी) और सुधा (वेदिका पिंटो) एक-दूसरे से बातें कर रहे हैं। वहीं, बैकग्राउंड में आवाज आ रही है, ‘जिंदगी में हर मुसाफिर किसी वजह से मिलता है। कोई थोड़ी देर के लिए। कोई जिंदगी भर के लिए’। इसके बाद सुधार और चंदर के बीच करीबी बढ़ती है। दोनों साथ घूमते-फिरते हैं। प्यार होता है। वेदिका कहती हैं, ‘तुम जैसे लोग थोड़ी देर से मिलते हैं’। विक्रांत कहते हैं, ‘और, तुम जैसे लोग ज्यादा रुकते नहीं’। इसी के साथ इस प्रेम कहानी पर विराम लगता है। विक्रांत दर्द में तड़पते हैं। वेदिका एक वकील की भूमिका में हैं।
प्रीति की एंट्री-
अगला सीन है, जहां क्लास चल रही होती है। किसी किताब के अंश समझाते हुए शिक्षक विद्यार्थियों से कहते हैं, ‘मोहब्बत का अजीब ही तरीका होता है। वो फिर से लौट आती है। किसी नए रूप में। किसी नई मुस्कुराहट के साथ’। इसी के साथ एंट्री होती है महिमा मकवाना की, जो प्रीति की भूमिका में हैं। किसी नई मुस्कुराहट के साथ’। प्रीति धीरे-धीरे चंदर की तरफ आगे बढ़ती है, लेकिन चंदर तो सुधा की यादों में है। तब प्रीति समझाती है, ‘कहां लिखा है ऐसा रूल कि हम दो लोगों को अलग-अलग लाइफ स्टेज में प्यार नहीं कर सकते’।
Kuch humsafar manzil tak nahi rukte, bas kahaani bann kar reh jaate hain 🏔️💌 pic.twitter.com/0xb4zgXRy7
— Netflix India (@NetflixIndia) July 14, 2026
सुधा की वापसी-
चंदर और प्रीति का रिश्ता आगे बढ़ता है। प्रीति कहती है, ‘चंदर की जिंदगी में अगर सुधा नहीं होती तो यह कैफे इतना स्पेशल नहीं होता’। चंदर कहता है, ‘सब जानते हैं कि यही वो लड़की है, जो इस कैफे को इतना स्पेशल बनाती है’। बैकग्राउंड में आवाज आती है, ‘हम पर किसी के होने का असर उतना ही होता है, जितना ना होने का’। प्रीति का एक डर है जो सवाल के रूप में उभरता है और वह चंदर से पूछती है, ‘मान लो किसी दिन अचानक तुम्हें सुधा मिल गई तो’? चंदर चौंक जाता है। और, अचानक सुधा मिल भी जाती है। बैकग्राउंड से फिर आवाज आती है, ‘कभी कभी सबसे बड़ा सफर वो होता है, जहां हम किसी नई जगह नहीं, बल्कि उस मोहब्बत के पास जाते हैं, जिसे हम खो चुके हैं’।
फिल्म 24 जुलाई से स्ट्रीम होगी, इस फिल्म को शरण्य राजगोपाल ने क्रिएट किया है. वहीं रुचिर अरुण ने फिल्म को डायरेक्ट किया है. ‘मुसाफिर कैफे’ दिव्य प्रकाश दुबे के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है।