Gujarat: गिर वन में 10 दिनों में आठ शेरों की मौत, शावकों की मौत में बेबेसिओसिस रोग की आशंका

Gujarat: पिछले दस दिनों में गुजरात के गिर वन में आठ एशियाई शेरों की मौत हो गई है, जिनमें चार शावक और चार वयस्क शेर शामिल हैं। इससे वन्यजीव अधिकारियों में चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों को संदेह है कि चार शावकों की मौत बेबेसिओसिस नामक परजीवी संक्रमण के कारण हुई है, जबकि बाकी वयस्क शेरों की मौत प्राकृतिक कारणों और क्षेत्रीय संघर्षों से हुई मानी जा रही है।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बेबेसिओसिस एक टिक-जनित रोग है जो प्रोटोजोआ परजीवी के कारण होता है और लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है। यह मलेरिया के समान है। समय पर पता न चलने और इलाज न होने पर घातक हो सकता है।

हालांकि, राज्य के अधिकारियों ने साफ किया है कि यह स्थिति किसी बड़े पैमाने पर प्रकोप का संकेत नहीं देती है। उन्होंने कहा कि ये मौतें वन क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में घटी छिटपुट घटनाएं प्रतीत होती हैं। एहतियात के तौर पर 17 वयस्क शेरों को अलग कर चिकित्सा निगरानी में रखा गया है। जूनागढ़ पशु चिकित्सा महाविद्यालय की पशु चिकित्सा टीमें वन विभाग के कर्मियों के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में निरंतर निगरानी और गश्त कर रही हैं।

गिर क्षेत्र में 350 से ज्यादा शेरों की स्वास्थ्य जांच और टिक-रोधी उपचार अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने स्थिति की समीक्षा की है और अधिकारियों को कड़ी निगरानी बनाए रखने के साथ वन्यजीवों के लिए समय पर चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया और वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है कि निरंतर निगरानी जारी है और स्थिति नियंत्रण में है। अभयारण्य में बाकी शेरों की आबादी की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

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