Uttarakhand: जब दर्शकों के सामने हिंदू महाकाव्य रामायण की गाथा पेश की जाती है, तो मंच रंगों, वेशभूषा और किरदारों से भर जाता है। यह उत्तराखंड के रामनगर में भवानीगंज रामलीला मंचन का 53वां साल है। यहां कलाकारों की कई पीढ़ियों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए इस गाथा को जिंदा रखा है।
कलाकारों के लिए रामलीला एक ऐसी परंपरा है जो बरसों की भागीदारी, समर्पण और मंच को जीवंत बनाए रखने के साझा भाव से कायम है। अब इस परंपरा को युवा कलाकार आगे बढ़ा रहे हैं, जो अपने बड़ों को रामलीला मंचन में शामिल होते देखकर बड़े हुए हैं।
हर साल दर्शकों को आकर्षित करने वाली भवानीगंज रामलीला, मंच पर हिंदू महाकाव्य की कालजयी कथा को जीवंत करती है।
इस रामलीला से जुड़े कलाकार अभिनय के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लेते और भगवान की सेवा भाव से मंचन करते हैं। ये सालाना प्रस्तुति रामायण की पारंपरिक कथा-वाचन शैली को जीवित रखती है और रामनगर में एक खास सांस्कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाती है।