Uttarakhand: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीनके प्रस्तावित दो दिवसीय कुमाऊं दौरे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं। कांग्रेस ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे को लेकर सवाल खड़े किए हैं, तो बीजेपी का कहना है कि पार्टी चुनाव के समय ही नहीं, बल्कि साल के 365 दिन संगठन को मजबूत करने में जुटी रहती है। दोनों दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के उत्तराखंड दौरे को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का कहना है कि चुनावी वर्ष में राष्ट्रीय अध्यक्षों का दौरा स्वाभाविक है और पार्टी के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों से संवाद के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व का आना जरूरी है।लेकिन कांग्रेस ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने हल्द्वानी में हुए घटनाक्रम को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि इस मुद्दे पर बीजेपी अब तक चुप है और राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के दौरान भी इस पर जवाब देना चाहिए राष्ट्रीय अध्यक्ष आकर कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं से संवाद करेंगे, लेकिन हल्द्वानी में जो घटनाक्रम हुआ, उस पर बीजेपी को जवाब देना होगा। सिर्फ संगठन को मजबूत करने से काम नहीं चलेगा, पिछले नौ साल का हिसाब भी जनता को देना पड़ेगा।” और अपने कार्यकर्ताओं को यह भी समझना होगा कि किसी दूसरे दल के नेताओं का अपमान करके राजनीतिक रोटियां नहीं सेकनी चाहिए
कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है। बीजेपी के राज्यसभा सांसद का कहना है कि बीजेपी सिर्फ चुनाव के समय सक्रिय होने वाली पार्टी नहीं है। पार्टी के कार्यकर्ता पूरे साल, 24 घंटे संगठन के लिए काम करते हैं चुनाव नजदीक आने पर संगठन की गतिविधियां और ज्यादा व्यवस्थित हो जाती हैं और राष्ट्रीय नेतृत्व के दौरे से कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा और दिशा मिलती है। कांग्रेस बेवजह उसे मुद्दे को तूल दे रही है जिससे भाजपा कार्यकर्ताओं का कोई लेना-देना ही नहीं धार्मिक संगठनों के लोगों द्वारा वहां पर हवन और शुद्धिकरण का काम किया गया था और कांग्रेस ने इसे एक चुनावी मुद्दा बनाकर पेश कर दिया
राष्ट्रीय अध्यक्षों के उत्तराखंड दौरे ने प्रदेश की सियासत को गर्म कर दिया है। कांग्रेस जहां बीजेपी से उसके कामकाज और हालिया हल्द्वानी घटनाक्रम पर जवाब मांग रही है, वहीं बीजेपी राष्ट्रीय नेतृत्व के दौरे को संगठन को और मजबूत करने की कवायद बता रही है। अब देखना होगा कि राष्ट्रीय अध्यक्षों के दौरे के दौरान सियासी बयानबाजी किस दिशा में आगे बढ़ती है।