Dehradun: देहरादून में ड्रग्स-शराब के खिलाफ महिलाओं ने संभाला मोर्चा, हाथों में लाठियां लेकर दिन-रात देती हैं पहरा

Dehradun:  उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के थानी गांव में हाथों में लाठियां लेकर दिन-रात सड़कों पर गश्त लगाती महिलाओं को देखा जा सकता है। महिलाओं का कहना है कि इस इलाके में ड्रग्स बेचने और खरीदने वालों ने आतंक मचा रखा है। इनकी वजह से यहां के लोगों, खासकर महिलाओं और बच्चों की जिंदगी बेहद मुश्किल हो गई है।

इन महिलाओं ने पिछले दो महीने से मोर्चा संभालना शुरू किया है। क्योंकि हालात इतने बिगड़ गए थे कि घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा था।

स्थानीय निवासी सुनीता शर्मा ने बताया कि “य थानी गांव है। हम लोग यहां पे इसलिए खड़े हैं कि हमने एक मुहिम उठाई थी। लगभग अब दो महीने हो चुके हैं इस मुहिम को। यहां पे भांग, गांजा, स्मैक, दारू – सब कुछ बिकता है यहां पे। बहुत सालों से बिक रहा था ये, लेकिन अब हद हो चुकी थी। इसलिए हम लोगों ने सोचा कि एक मुहिम उठानी चाहिए। हम सब एक हुए। हम सब औरतों ने बीड़ा उठाया कि हम नशे को यहां से खत्म करेंगे।”

महिलाओं का कहना है कि “हम लोगों को ये दिक्कत आने लगी थी कि माहौल बहुत खराब था। अगर छत पे भी वॉक कर रहे हैं, तो भी नशेड़ी यहीं पे खड़े होके, मंदिर के सामने खड़े हैं। पहुंचा दो। ऐसा बोलते थे और रोड पे आना तो बहुत मुश्किल था। वॉक नहीं कर पाते थे। बहुत तेजी से गाड़ियां भगाते थे। नशा लेके जब जाते हैं तो बहुत तेजी से गाड़ियां भगाते हैं। रोड पे निकलना हमारे लिए नामुमकिन था। तो ये सब देखते हुए, बहुत परेशानियां थीं। बच्चे दुकानों पे नहीं जा सकते। बाहर नहीं निकल सकते। हम लोगों के लिए खतरा ही था। रोड पे आना बहुत टेढ़ी खीर था। मेहमानों के आने पे मेहमानों को भी रोका जाता था। कोई यंग मेहमान, भाई वगैरह आते हैं तो उनको भी रोका जाता था। कुछ लेना है, कुछ लेने आए हो। हर किसी को यही बोलते हैं। जो यहां पे बाहर का भी आएगा तो लेने आए हो, चाहिए कुछ? ऐसा।”

“सुबह मॉर्निंग शिफ्ट होती है। जैसे सात से दस तक जो महिलाएं हैं, वो अपना काम करके आती हैं और 10 बजे तक रहती हैं। फिर 10 से दो बजे तक रहती हैं। फिर दो से पांच बजे तक रहती हैं। फिर पांच से साढ़े सात तक रहती हैं। फिर साढ़े सात के बाद जो महिलाएं रहती हैं, वो 11, साढ़े ग्यारह, 12, एक या दो भी बज जाते हैं। तो ऐसे शिफ्ट हमने लगाई है।”

महिलाओं का कहना है कि उनकी कोशिशों से काफी फर्क पड़ा है। जमीनी स्तर पर बदलाव साफ दिख रहे हैं। उनका इरादा अपनी लड़ाई जारी रखने का है। उनका कहना है कि अगर वे खुद हालात को नहीं संभाल पाईं, तो स्थानीय प्रशासन और पुलिस से मदद लेंगी। फिलहाल, थानी की महिलाओं ने निगरानी का सिलसिला बदस्तूर जारी रखने का फैसला किया है। उनका कहना है कि वे अपने समुदाय की सुरक्षा के लिए ड्रग्स और शराब को जड़ से खत्म करने के इरादे पर अडिग हैं।

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