Dehradun: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून, जिसे हम ‘एजुकेशन और हेल्थ हब’ के रूप में जानते हैं, वहां स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट के सख्त नियमों के बावजूद, जिले में सैकड़ों अस्पताल बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के बाद भी इन अस्पतालों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। आखिर क्यों ये अस्पताल कानून को चुनौती दे रहे हैं और क्यों 600 में से मात्र 10 ने ही अब तक रजिस्ट्रेशन कराया है
राजधानी देहरादून में मरीजों की जान से खिलवाड़ का एक बड़ा खेल चल रहा है। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ मनोज शर्मा ने आंकड़ों के साथ जानकारी देते हुए बताया हमारे जिले में 2590 अस्पताल पंजीकृत हैं, लेकिन 600 अस्पताल ऐसे हैं जो बिना किसी रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे हैं। जबकि 490 अस्पतालों ने अपना रजिस्ट्रेशन कैंसिल करवा कर बंद कर दिए है।
जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी यानी CMO द्वारा विज्ञापन जारी कर इन अवैध अस्पतालों को पंजीकरण कराने का मौका दिया गया, तो नतीजा बेहद निराशाजनक रहा। 600 में से सिर्फ 10 अस्पतालों ने ही रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने की जहमत उठाई।
इतना ही नहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पिछले वर्ष जब 61 अस्पतालों का निरीक्षण किया था तो 44 अस्पतालों में कमियां पाई गई थी, जिनको नोटिस जारी किया गया था। इनमें से 25 अस्पतालों ने सुधार कर विभाग को जबाव दे दिया है, जिन 11 अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ था उन्होंने करवा लिया है।
नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों को विभाग ने नोटिस भी जारी किए थे। हैरानी की बात यह है कि जहां कुछ अस्पतालों ने सुधार करते हुए नोटिस का जवाब दिया, वहीं दर्जनों अस्पताल ऐसे भी हैं जिन्होंने प्रशासन के नोटिस को रद्दी के भाव समझा और अब तक कोई जवाब देना भी उचित नहीं समझा।