उत्तराखंड में चीन सीमा से जुड़ी दो सीमांत सड़कों के निर्माण का रास्ता साफ

नमिता बिष्ट

उत्तरकाशी। गंगोत्री नेशनल पार्क में चीन सीमा से जुड़ी दो सीमांत सड़कों के निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में 28 किलोमीटर लंबी इन दोनों सड़कों के लिए बीआरओ को 62.05 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। अब जल्द ही इन दोनों सामरिक महत्व की सड़कों के निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद भारतीय सेना की पहुंच आसानी से सीमा तक हो सकेगी।

बता दें कि इससे पहले 29 जून 2020 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई उत्तराखंड राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक में इन सड़कों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी। अब इसी सप्ताह महाराष्ट्र में हुई राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में इन सड़कों के सामरिक महत्व को देखते हुए वन भूमि हस्तांतरण के साथ निर्माण को मंजूरी दी गई है। बैठक में प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन समीर सिन्हा सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

चुनौती भरा होगा शीत मरूस्थलीय क्षेत्र में सड़क बनाना

गंगोत्री नेशनल पार्क के भीतर चीन सीमा से लगी भारतीय सीमा में जिन दो सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी गई, यह पूरा क्षेत्र हाई एल्टीट्यूड में आता है। इसे शीत मरूस्थल भी कहा जाता है। यहां सड़क निर्माण करना किसी चुनौती से कम नहीं है। वृक्ष विहीन इस पूरे क्षेत्र में वायु के कम दबाव के कारण सांस लेने में भी परेशानी होती है। इन क्षेत्रों में अत्यधिक बर्फबारी के कारण यहां काम के लिए बहुत कम समय मिलता है। घाटी में मौजूद एक छोटी नदी को छोड़ दिया जाए तो दूर-दूर तक यहां पानी का नामोनिशान नहीं होता।

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