Uttar Pradesh: राम मंदिर चढ़ावा घोटाले में 8 आरोपी नामजद FIR, करोड़ों की हेराफेरी का खुलासा

Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश की अयोध्या से सामने आए राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत के बाद प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। एफआईआर दर्ज होने के साथ ही पुलिस ने आरोपियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

CCTV फुटेज से हुआ खुलासा, ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज हुई FIR

सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर के दानपात्र से चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी का पूरा मामला मंदिर परिसर में लगे हाई-टेक CCTV कैमरों में कैद हो गया। फुटेज में कुछ लोग नकदी के साथ छेड़छाड़ करते और रकम निकालते हुए दिखाई दिए। इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज किया।

इस मामले में कुल आठ लोगों को नामजद किया गया है, जबकि कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी सह-आरोपी बनाया गया है। खास बात यह है कि एफआईआर में फिलहाल उन्हीं लोगों को आरोपी बनाया गया है जो सीधे तौर पर कैश कलेक्शन और काउंटिंग प्रक्रिया से जुड़े थे।

60 लाख रुपये बरामद, कई और खुलासों की उम्मीद

सूत्रों के मुताबिक पुलिस अब तक करीब 60 लाख रुपये बरामद कर चुकी है। पूछताछ में मुख्य आरोपी टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव ने कई अहम जानकारियां दी हैं। जांच एजेंसियों को कुछ बैंक अधिकारियों की भूमिका के भी संकेत मिले हैं। पुलिस का मानना है कि विवेचना आगे बढ़ने के साथ और भी नाम सामने आ सकते हैं।

बाथरूम में छिपाई जाती थीं नोटों की गड्डियां

जांच में सामने आया है कि आरोपी चढ़ावे से निकाली गई नकदी को पहले बाथरूम में छिपाते थे। बाद में मौका मिलने पर रकम मंदिर परिसर से बाहर ले जाकर एक तय मकान में बांटी जाती थी। प्रारंभिक जांच के अनुसार यह खेल पिछले दो से तीन वर्षों से चल रहा था।

8 नामजद आरोपी

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनके नाम इस प्रकार हैं—रमाकांत यादव उर्फ टिन्नू यादव,लवकुश मिश्रा (गिरफ्तार), अनुकल्प मिश्रा (गिरफ्तार),अविनाश शुक्ला, मनीष यादव,रमाशंकर मिश्र, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, करुणेश पांडे

SIT की गोपनीय रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला

राम मंदिर के चढ़ावे में गबन और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली टीम ने लगातार छह दिनों तक राम मंदिर परिसर में गहन जांच की।

जांच के दौरान मंदिर प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और ट्रस्ट से जुड़े 60 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई। SIT ने दो दिन पहले अपनी प्रारंभिक गोपनीय रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी थी। मुख्यमंत्री ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि प्रभु श्रीराम के दरबार में भ्रष्टाचार या चोरी करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा था कि इस मामले में पूरी सच्चाई सामने लाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होगी।

राम मंदिर में बदली पूरी व्यवस्था, सुरक्षा और पारदर्शिता पर विशेष जोर

SIT की प्रारंभिक जांच के बाद राम मंदिर में दान राशि के संग्रहण और कैश काउंटिंग की व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए हैं। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं—

 पुराने स्टाफ को हटाया गया: कैश हैंडलिंग से जुड़े कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाकर अन्य विभागों में भेज दिया गया है।

बैंक अधिकारियों की तैनाती: अब दानपात्र की राशि की गिनती मंदिर के चुनिंदा कर्मचारियों के साथ बैंक अधिकारियों की निगरानी में की जाएगी।

हाई-टेक निगरानी व्यवस्था: कैश काउंटिंग रूम में नए अत्याधुनिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इसके लिए अलग कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जहां हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी।

एंट्री-एग्जिट पर सख्त जांच : काउंटिंग रूम में प्रवेश और निकास के दौरान कर्मचारियों की 100 प्रतिशत सघन तलाशी अनिवार्य कर दी गई है।

ट्रिपल क्रॉस-वेरिफिकेशन सिस्टम : दान की राशि बैंक में जमा करने से पहले तीन अलग-अलग जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सत्यापन किया जाएगा। तीनों के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे, जिससे किसी भी प्रकार की हेराफेरी की संभावना समाप्त हो सके।

संदेश साफ: राम मंदिर में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में हुई कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि योगी सरकार धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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