UPSSSC PET 2026: उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी और नकलमुक्त बनाने के लिए योगी सरकार तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर दे रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET)-2026 के दूसरे दिन की परीक्षा शुक्रवार को प्रदेश के सभी 60 जनपदों में शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित की गई। दो पालियों में हुई परीक्षा के लिए कुल 11,80,434 अभ्यर्थियों को आवंटित किया गया था, जिनमें से 7,87,964 परीक्षार्थी शामिल हुए। इस तरह कुल उपस्थिति 66.75 प्रतिशत दर्ज की गई।
PET-2026 का आयोजन 25 अक्टूबर, 30 अक्टूबर और 1 नवंबर को तीन अलग-अलग दिनों में किया जा रहा है। परीक्षा के लिए प्रदेश के 60 जिलों में 1,372 केंद्र बनाए गए हैं। तीनों दिनों की परीक्षा के लिए आयोग ने कुल 35,41,297 अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र जारी किए हैं। परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में हो रही है। पहली पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है।
31,602 CCTV कैमरों से रखी गई परीक्षा केंद्रों पर नजर
परीक्षा को नकलमुक्त और पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रदेशभर में व्यापक निगरानी तंत्र तैयार किया गया था। सभी परीक्षा केंद्रों पर लगाए गए 31,602 CCTV कैमरों के जरिए प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी गई। आयोग मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम से वरिष्ठ अधिकारियों ने लाइव निगरानी की। इसके अलावा जिला स्तर पर भी कमांड सेंटर और CCTV कंट्रोल रूम स्थापित किए गए थे, जहां से स्थानीय प्रशासन परीक्षा की व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए था।
परीक्षा के सफल संचालन के लिए 2,744 सेक्टर और स्टैटिक मजिस्ट्रेट तैनात किए गए थे। इसके साथ ही करीब 93,738 अधिकारियों और कर्मचारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गईं। परीक्षा से पहले सभी संबंधित कर्मियों को आवश्यक प्रशिक्षण और दिशा-निर्देश दिए गए। मजिस्ट्रेटों ने परीक्षा केंद्रों का दौरा कर सुरक्षा एवं अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अभ्यर्थियों की सहायता के लिए प्रत्येक परीक्षा वाले जिले में अलग हेल्पलाइन भी शुरू की गई थी।
AI और बायोमेट्रिक तकनीक से अभ्यर्थियों का सत्यापन
फर्जी अभ्यर्थियों की पहचान और अनुचित गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए परीक्षा केंद्रों पर आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। अभ्यर्थियों के सत्यापन के लिए फेसियल रिकॉग्निशन AI और आधार आधारित प्रमाणीकरण की व्यवस्था लागू की गई। परीक्षा में शामिल होने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी की तस्वीर, आइरिस और अन्य बायोमेट्रिक जानकारियां दर्ज की गईं। परीक्षा ड्यूटी में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य रखी गई।
केंद्रों में प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की निर्धारित प्रक्रिया के तहत तलाशी ली गई। मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, स्मार्ट वॉच, स्मार्ट ग्लास सहित सभी प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को परीक्षा कक्ष में ले जाने की अनुमति नहीं थी।
इस दौरान झांसी में आकाश पटेल नाम के एक परीक्षार्थी के पास ब्लूटूथ डिवाइस मिलने का मामला सामने आया। इस संबंध में संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके अतिरिक्त, पहली पाली में 13 और दूसरी पाली में 9 अभ्यर्थियों समेत कुल 22 परीक्षार्थियों को AI मैचिंग के जरिए संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है। आयोग इन मामलों की पड़ताल कर रहा है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
20 जिलों के परीक्षा केंद्रों पर लगाए गए जैमर
परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से नकल की आशंका को रोकने के लिए 20 जनपदों के परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाए गए थे। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए पुलिस तथा जिला प्रशासन की टीमें लगातार सक्रिय रहीं। अधिकारियों ने परीक्षा की पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखी।
परीक्षार्थियों के आवागमन के लिए अतिरिक्त बसों और ट्रेनों की व्यवस्था
दूर-दराज के क्षेत्रों से परीक्षा देने पहुंचने वाले अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त बसों और ट्रेनों का संचालन किया गया। इसके साथ ही यातायात को व्यवस्थित रखने और परीक्षार्थियों के सुरक्षित आवागमन के लिए जरूरी इंतजाम किए गए। किसी भी तरह की परेशानी होने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए जिलों में हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए।
आयोग के मुताबिक, परीक्षा केंद्रों में अभ्यर्थियों के प्रवेश से लेकर परीक्षा पूरी होने और प्रश्नपत्रों सहित अन्य परीक्षा सामग्री के सुरक्षित प्रबंधन तक सभी निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन कराया गया। इस पूरी व्यवस्था में जिला प्रशासन, पुलिस, एसटीएफ, इंटेलिजेंस विभाग, सेक्टर एवं स्टैटिक मजिस्ट्रेट, केंद्र व्यवस्थापकों और अन्य कर्मचारियों ने आपसी समन्वय के साथ जिम्मेदारियां निभाईं।
आयोग ने दूसरे दिन की परीक्षा के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले सभी विभागों और कर्मचारियों का आभार जताया है। साथ ही 1 नवंबर को प्रस्तावित अंतिम चरण की परीक्षा के लिए भी इसी तरह सहयोग बनाए रखने की अपील की है। आयोग का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता कायम रखना, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और अभ्यर्थियों के भरोसे को मजबूत बनाए रखना उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।