UP News: ‘बजरंगियों’ को सतर्क रहना होगा, ‘बाबरी भक्त’ राम मंदिर आंदोलन को बदनाम करेंगे- मुख्यमंत्री योगी

UP News:  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “बजरंगियों” को उन “बाबरी भक्तों” से सावधान रहना चाहिए जो राम मंदिर आंदोलन को बदनाम और अपमानित करने की कोशिश करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे रामायण में राक्षस कालनेमी ने भगवान हनुमान को धोखा देने की कोशिश की थी।

राम जन्मभूमि आंदोलन में बाधा डालने की साजिश रचने के लिए समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और वामपंथियों पर निशाना साधते हुए लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा कि इन पार्टियों ने आधिकारिक निमंत्रण के बावजूद राम मंदिर उद्घाटन समारोह में भाग नहीं लिया क्योंकि उन्हें “जालीदार टोपी” पहनने वालों के बीच समर्थन खोने का डर था। वो विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के दिवंगत दिग्गज नेता अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो लोग कभी राम मंदिर का विरोध करते थे, वे अब राम भक्त होने का दिखावा कर रहे हैं, उन्होंने कहा “ये वीएचपी की वैचारिक जीत है।”

योगी ने कहा, “हालांकि, आप सभी ‘बजरंगियों’ (हनुमान भक्तों) को उन ‘कालनेमी’ जैसे लोगों के प्रति सतर्क रहना चाहिए, जो राम के मकसद में घुसपैठ करते हैं। ऐसे कालनेमियों की पहचान करना जरूरी है जो आंदोलन को बदनाम और अपमानित करने की कोशिश करेंगे।” मुख्यमंत्री ने कहा, “आप, बजरंगबली के भक्तों को इन ‘बाबरी भक्तों’ की साजिशों को सफल नहीं होने देना चाहिए, जो (आंदोलन में) घुसपैठ करने की कोशिश करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे कालनेमी ने किया था ताकि आपको नीचा दिखाया जा सके…।”

रामायण में, कालनेमी एक राक्षस था जिसे रावण ने भगवान हनुमान को रोकने का काम सौंपा था, जब वे भगवान लक्ष्मण को बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाने हिमालय गए थे। बिना किसी का नाम लिए आदित्यनाथ ने कहा, “कुछ नकलची ज्ञापन सौंपने निकले हैं जिनमें गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग की गई है। जानवर तो आप हैं। गाय हमारी माता है, और हमारा उसके साथ एक शाश्वत बंधन है।” उन्होंने कहा, “हमारी ‘गौ माता’ को जानवर कहना आपकी पशु-जैसी बुद्धि का संकेत है। इसलिए, किसी को भी इस मुद्दे पर सवाल उठाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके बजाय व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से गाय पालन से जुड़ना चाहिए।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ये भी दावा किया कि कांग्रेस ने पहले सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा देकर कहा था कि “राम और कृष्ण का कोई अस्तित्व नहीं है” और आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा हिंदुओं का “अपमान” करती रही है। आज की अयोध्या की तुलना उसके पुराने स्वरूप से करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि जिन लोगों ने कभी अयोध्या में ‘परिक्रमा’ पर रोक लगाई थी, वे अब उसी जगह पर भव्य ‘दीपोत्सव’ होते हुए देख रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “लगभग 475 सालों तक अयोध्या ने अपमान, बेइज्जती और उपेक्षा झेली। वहां न सड़कें थीं, न बिजली, न बुनियादी सुविधाएं और न ही सफाई। ‘राम की पैड़ी’ में पानी तो आता था लेकिन वहीं रुककर सड़ने लगता था। जब 2017 में (बीजेपी) सरकार बनी, तो मैंने सोचा कि उस सड़े हुए पानी का क्या किया जाए।

इसके बाद ‘राम की पैड़ी’ को हरिद्वार की ‘हर की पैड़ी’ जैसा रूप दिया गया। अब सरयू का पानी एक तरफ से आता है और दूसरी तरफ से निकल जाता है। जहां कभी गंदगी थी, वहां अब अयोध्या ‘दीपोत्सव’ की रोशनी से जगमगा रही है।” उन्होंने कहा कि तंग और टूटी-फूटी गलियों की जगह अब चार-लेन वाली सड़कें बन गई हैं और महर्षि वाल्मीकि के नाम पर एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी बनाया गया है। अपने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए आदित्यनाथ ने कहा, “‘रामद्रोही’ (भगवान राम के विरोधी) इसे कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं? वे इसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं कर सकते। इसलिए वे तरह-तरह की साजिशें रचते हैं और अयोध्या को बदनाम करने की हर मुमकिन कोशिश करते हैं और आगे भी ऐसा ही करते रहेंगे।”

राम मंदिर आंदोलन में सिंघल के योगदान की तारीफ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 1990 में जब उत्तर प्रदेश की तत्कालीन “रामद्रोही” सरकार (जिसकी अगुवाई तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव कर रहे थे) ने अयोध्या में राम भक्तों पर गोलियां चलवाई थीं, तब एक आवाज जो “शेर की दहाड़” की तरह गूंजी थी, वो अशोक सिंघल की थी। आदित्यनाथ ने कहा कि सिंघल “तानाशाह सरकार” के सामने झुके नहीं, बल्कि डटे रहे और मुकाबला किया। उन्होंने कहा, “आज अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर के साथ उनके सपने सच हो गए हैं।”

आदित्यनाथ ने आगे कहा कि जब श्री राम जन्मभूमि का मामला अदालतों में पहुंचा तो सिंघल के वकीलों, पुरातत्वविदों और विषय-विशेषज्ञों की टीम राम जन्मभूमि आंदोलन के समर्थन में सबूत जुटा रही थी, जबकि कांग्रेस, एसपी और वामपंथी राम मंदिर और हिंदुओं के पक्ष में फैसला आने से रोकने के लिए बाधाएं खड़ी कर रहे थे। योगी आदित्यनाथ ने कहा, “श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से न्योता मिलने के बावजूद वे न तो शिलान्यास समारोह में शामिल हुए और न ही भगवान राम के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में। उन्होंने सिर्फ अपने वोट बैंक का ध्यान रखा। उस समय उन्हें लगा कि अगर वे वहां गए तो ‘जालीदार टोपी’ वाला वोट बैंक हाथ से निकल जाएगा। डर की वजह से वे नहीं गए।”

योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर आंदोलन के अलग-अलग हिस्सों को एक मंच पर लाने का श्रेय भी सिंघल को दिया। उन्होंने अपने गुरु, दिवंगत महंत अवैद्यनाथ और सिंघल के बीच हुई मुलाकातों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि वे मंदिर के डिजाइन, आंदोलन की रणनीति और भविष्य की अयोध्या के विजन पर चर्चा करते थे, आदित्यनाथ ने कहा कि सिंघल को इसलिए याद किया जाता है क्योंकि उन्होंने अपने वादे पूरे किए।

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