UP News: भारत-जापान स्वास्थ्य साझेदारी को मिलेगी नई ऊंचाई, बोले ब्रजेश पाठक

UP News:  उत्तर प्रदेश और जापान के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को व्यापक और परिणामदायी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। भारत-जापान की मजबूत साझेदारी को स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा, अत्याधुनिक तकनीक, कौशल विकास, अनुसंधान और वृद्धजन देखभाल से जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश में एक एकीकृत और भविष्य-उन्मुख हेल्थकेयर मॉडल विकसित करने की तैयारी है। यह कहना है प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का, इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इंवेस्टमेंट मीट- 2026 को संबोधित कर रहे थे।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि इस मीट का उद्देश्य केवल अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी, कौशल, नवाचार, अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को एक साथ जोड़कर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाना है। उन्होंने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में पिछले वर्षों में तेजी से विस्तार हुआ है। प्रदेश में वर्तमान में 81 मेडिकल कॉलेज, जिनमें 45 सरकारी और 36 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। 60 जिलों में मेडिकल कॉलेज की सुविधा उपलब्ध है, जबकि शेष जिलों में पीपीपी मॉडल के माध्यम से मेडिकल कॉलेज विकसित करने की योजना है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश में MBBS की 4,540 सीटें थीं, जो बढ़कर 12,800 हो चुकी हैं। वहीं पीजी सीटों की संख्या भी 1,221 से बढ़कर 4,995 हो गई है। इससे प्रदेश में डॉक्टरों की उपलब्धता और चिकित्सा शिक्षा के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि उत्तर प्रदेश में उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है। एम्स गोरखपुर और एम्स रायबरेली के साथ गोरखपुर, झांसी, प्रयागराज, मेरठ, कानपुर और आगरा में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार हुआ है। न्यूरोसर्जरी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी जैसी विशिष्ट सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। वहीं कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान में उन्नत कैंसर निदान एवं अनुसंधान सुविधाओं तथा एसजी पीजीआई में एडवांस्ड पीडिएट्रिक सेंटर एवं डायबिटीज सेंटर के विकास पर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नई स्वास्थ्य रणनीति में अस्पतालों के विस्तार के साथ-साथ एक मजबूत केयर एकॉनोमी इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर है। उन्होंने बताया कि इसके पांच प्रमुख आधार होंगे, जिनमें मजबूत स्वास्थ्य एवं देखभाल का बुनियादी ढांचा, एआई , डिजिटल हेल्थ और अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक, डॉक्टरों, नर्सों एवं हेल्थकेयर वर्कफोर्स का कौशल विकास, अनुसंधान एवं नवाचार, निवेश, रोजगार और उद्योग की भागीदारी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस मॉडल के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र को केवल उपचार तक सीमित न रखते हुए रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा।

जापान की विशेषज्ञता से वृद्धजन देखभाल को मिलेगा नया आयाम
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि जापान के वृद्धजन स्वास्थ्य एवं देखभाल मॉडल से उत्तर प्रदेश महत्वपूर्ण सीख ले सकता है। दोनों पक्षों के बीच वृद्धजन देखभाल, डिमेंशिया केयर, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास, घर आधारित एवं दीर्घकालिक देखभाल, प्रशामक देखभाल और समुदाय आधारित देखभाल जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। यामानाशी प्रीफेक्चर के साथ विशेष सहयोग के तहत स्वस्थ वृद्धावस्था, देखभाल कर्मियों के कौशल विकास, डिजिटल हेल्थ, सहायक तकनीक तथा संयुक्त प्रशिक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विचार किया जा सकता है।

यूपी-जापान हेल्थकेयर वर्कफोर्स कॉरिडोर की तैयारी
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि उत्तर प्रदेश और जापान के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधन को लेकर भी नई संभावनाएं खुल रही हैं। प्रस्तावित यूपी-जापान हेल्थकेयर वर्कफोर्स कॉरिडोर के माध्यम से प्रशिक्षण, जापानी भाषा, कौशल विकास, प्रमाणन, जापान में व्यावहारिक अनुभव और रोजगार को एक साथ जोड़ा जा सकता है। इसका उद्देश्य केवल रोजगार के लिए मानव संसाधन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल, तकनीक और प्रतिभा का द्विपक्षीय विकास करना है। स्वास्थ्य क्षेत्र में जापानी कंपनियों और संस्थानों के साथ चिकित्सा उपकरण निर्माण, आधुनिक निदान तकनीक, डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, दूरस्थ रोगी निगरानी, पुनर्वास तकनीक, स्मार्ट हेल्थ सिस्टम और स्वास्थ्य सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जापानी कंपनियों को केवल निवेश के लिए नहीं, बल्कि नवाचार, निर्माण, प्रशिक्षण और भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं के समाधान विकसित करने के लिए साझेदार के रूप में आमंत्रित कर सकता है।

संयुक्त अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों एवं चिकित्सा संस्थानों को जापान के विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, अनुसंधान संस्थानों और तकनीकी कंपनियों से जोड़ने की दिशा में भी संभावनाएं हैं। कैंसर, मधुमेह, वृद्धजन स्वास्थ्य, पुनर्वास, डिजिटल हेल्थ, एआई, निदान तकनीक और चिकित्सा उपकरणों को प्राथमिक क्षेत्रों में रखा जा सकता है। संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, विशेषज्ञों एवं शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान, संयुक्त प्रशिक्षण, तकनीक हस्तांतरण और नवाचार केंद्रों के माध्यम से दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र की साझेदारी को नई मजबूती मिल सकती है। भारत-जापान की साझेदारी का अगला चरण केवल निवेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्वास्थ्य, कौशल, तकनीक, अनुसंधान और रोजगार को जोड़ते हुए एक ऐसे मॉडल की दिशा में बढ़ेगा, जो उत्तर प्रदेश को भविष्य की स्वास्थ्य अर्थव्यवस्था का मजबूत केंद्र बना सके।

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