Ramleela: न तो सजावट और रोशनी से जगमगाता कोई शानदार मंच, न कोई डिजिटल स्क्रीन और न ही किरदार निभाते पेशेवर कलाकार। उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के पास जमुनीपुर गांव में रामलीला का मंचन यहां रहने वाले लोग ही करते हैं। अभिनय और मेकअप से लेकर दूसरी तैयारियों तक, सब कुछ गांव वाले ही संभालते हैं।
यह गांव इस महाकाव्य के मंचन की अपनी सदियों पुरानी परंपरा को बरकरार रखे हुए हैं। यहां रामलीला दिन की प्राकृतिक रोशनी में होती है और आर्टिफिशियल लाइट और साउंड का बहुत कम इस्तेमाल किया जाता है। आयोजकों के मुताबिक, इस परंपरा का जिक्र सौ साल से भी पुराने लिखित रिकॉर्ड में मिलता है, जिसमें ब्रिटिश शासन के दौरान रामलीला के मंचन के लिए ली गई मंजूरी भी शामिल है।
रामलीला की तैयारियां लगभग एक महीने पहले शुरू हो जाती हैं, जिसमें अनुभवी कलाकार युवाओं को उनकी भूमिकाओं के बारे में मार्गदर्शन देते हैं। युवा कलाकार कहते हैं कि उनके लिए रामलीला में हिस्सा लेना पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाने और दोस्तों के साथ मंच साझा करने का एक तरीका है।
नवरात्रि के दौरान भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग अंदाज में रामलीला का मंचन किया जाता है। ये आयोजन समुदायों को साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करता है और भगवान श्रीराम की राक्षस राजा रावण के विरुद्ध लड़ाई और बुराई पर उनकी जीत की महाकथा को बयां करता है।