cm yogi: ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों को अचानक आने वाली आर्थिक परेशानियों से राहत दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार जोखिम निवारण निधि के जरिए सहायता उपलब्ध करा रही है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित इस योजना से अब तक 36,330 ग्राम संगठनों को 415 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि दी जा चुकी है। इस पहल का उद्देश्य आपात परिस्थितियों में जरूरतमंद परिवारों को स्थानीय स्तर पर आर्थिक मदद पहुंचाना है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के अनुसार, जोखिम निवारण निधि ग्रामीण परिवारों के लिए मुश्किल समय में आर्थिक सहारा उपलब्ध कराने का माध्यम है। इसके तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और पंचायत स्तर पर रहने वाले ऐसे जरूरतमंद परिवारों को भी सहायता दी जाती है, जो किसी समूह के सदस्य नहीं हैं। ग्राम संगठनों के माध्यम से इस व्यवस्था का संचालन किया जाता है, ताकि जरूरत के समय प्रभावित परिवारों तक जल्द मदद पहुंच सके।
बीमारी, दुर्घटना और प्राकृतिक आपदा में मिलेगी आर्थिक सहायता
इस निधि का इस्तेमाल कई तरह की आपात स्थितियों में किया जा सकता है। इनमें खाद्य संकट, अचानक गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के अलावा बाढ़, आगजनी, आकाशीय बिजली, सूखा और दुर्घटनाओं से प्रभावित परिवारों को सहायता देना शामिल है।
इस योजना के तहत विशेष रूप से एकल महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, प्रवासी श्रमिकों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाती है।
हर ग्राम संगठन को एकमुश्त 1.50 लाख रुपये का फंड
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रावधानों के मुताबिक, प्रत्येक ग्राम संगठन को एक बार डेढ़ लाख रुपये की राशि जोखिम निवारण निधि के रूप में उपलब्ध कराई जाती है। यह रकम कॉरपस फंड के तौर पर संगठन के पास सुरक्षित रहती है और जरूरत पड़ने पर पात्र परिवारों की मदद के लिए इस्तेमाल की जाती है।
इस व्यवस्था के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह के किसी सदस्य को अधिकतम 5,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल सकती है। वहीं, गैर समूह परिवारों को भी स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने के उद्देश्य से इस निधि का उपयोग किया जाता है। विशेष परिस्थितियों में ग्राम संगठन के पदाधिकारियों की सहमति से सहायता राशि अनुदान के रूप में भी प्रदान की जा सकती है।
महिला स्वयं सहायता समूह बन रहे ग्रामीण आर्थिक सुरक्षा का आधार
इस पूरी व्यवस्था में महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों की अहम भागीदारी है। ये संगठन अपने गांवों में आर्थिक संकट से गुजर रहे परिवारों की पहचान करते हैं और जरूरत के मुताबिक उन्हें सहायता उपलब्ध कराते हैं। इससे ग्रामीण समुदायों में आपसी सहयोग को बढ़ावा मिलने के साथ ही परिवारों को अचानक आने वाली आर्थिक चुनौतियों से निपटने में मदद मिलती है।
इसके अलावा, ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत बैंक ऋण से भी जोड़ा जा रहा है। मिशन की शुरुआत से अब तक 9.75 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के लिए कुल 11,378 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया जा चुका है।
इस वित्तीय सहयोग के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार शुरू करने, आजीविका के नए विकल्प विकसित करने और अपने छोटे व्यवसायों का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही हैं।