Virat Kohli: दिग्गज भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली ने कहा है कि अगले साल होने वाला वनडे विश्व कप भारत के लिए उनका आखिरी विश्व कप होगा जिसमें खिताब जीतने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए वह अपना सब कुछ झोंक देंगे। सैंतीस साल के कोहली अब सिर्फ एक ही प्रारूप में खेल रहे हैं। उन्होंने रविवार से यहां वेस्टइंडीज के खिलाफ शुरू होने वाली वनडे श्रृंखला से पहले ‘जियोस्टार’ से बातचीत में अपने भविष्य को लेकर यह बात कही। अगले साल का विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा।
कोहली ने कहा, ‘‘मेरे लिए यह भारत की ओर से खेला जाने वाला आखिरी विश्व कप होगा और यही मेरी प्रेरणा है।मैं अपना सब कुछ झोंक देना चाहता हूं। निश्चित रूप से लक्ष्य विश्व कप जीतना है और इसके लिए जो भी करना पड़ेगा, मैं उसके लिए पूरी तरह तैयार हूं।’’ विराट कोहली 2011 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रह चुके हैं। नवंबर में 38 वर्ष के होने जा रहे कोहली ने कहा कि 50 ओवर के विश्व कप की चुनौती और उसमें खेल का दबाव किसी भी अन्य प्रारूप से अधिक होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘अब आपको टी20 स्तर की तीव्रता वाले करीब 10 मुकाबले खेलने होते हैं। लेकिन एक दिन में आप ढाई टी20 मैच के बराबर क्रिकेट खेल रहे होते हैं। इतने बड़े टूर्नामेंट और विश्व कप में 10 मैचों तक उस लय को बनाए रखना आसान नहीं है। इसके अलावा इस बार मुकाबले विदेशी परिस्थितियों में होंगे जो काफी चुनौतीपूर्ण होते है।
कोहली के साथी और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने भी वनडे विश्व कप जीतने के अपने सपने को लेकर बात की । 39 वर्षीय रोहित ने कहा कि जब तक वह खेल रहे हैं, तब तक कुछ बड़ा हासिल करने के लिए कोशिश करते रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे मन में यह विचार कभी नहीं आएगा कि जो हासिल करना था, वह पूरा हो चुका है। जब तक आप खेल रहे हैं, आगे देखने के लिए हमेशा कुछ न कुछ होता है। मैं विश्व कप और उसमें अपने लिए मौजूद संभावनाओं को लेकर उत्साहित हूं।’’ रोहित ने कहा कि विश्व कप या किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट की अपनी अलग चुनौती होती है, क्योंकि इसमें अलग-अलग टीमों और मैदानों पर खेलना पड़ता है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब विश्व कप खेला जाता है या हम किसी आईसीसी टूर्नामेंट में उतरते हैं, तो उसकी अपनी अनूठी चुनौती होती है। आपको अलग-अलग प्रतिद्वंदियों और अलग-अलग मैदानों पर खेलना होता है। इसलिए तैयारी भी अलग तरीके से करनी पड़ती है और सोचने का तरीका भी बदलना होता है। यही इसकी चुनौती है’’