Sports: युवा ओलंपिक में तन्वी पत्री ने रचा इतिहास, बैडमिंटन महिला एकल के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनीं

Sports:  भारतीय बैडमिंटन की युवा प्रतिभा तन्वी पत्री ने युवा ओलंपिक खेलों में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, ओडिशा की 15 वर्षीय खिलाड़ी ने महिला एकल स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वह युवा ओलंपिक के इस वर्ग के खिताबी मुकाबले तक पहुंचने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बन गई हैं।

तन्वी ने सेमीफाइनल में जापान की दूसरी वरीयता प्राप्त युजुनो वतनबे को तीन गेम तक चले रोमांचक मुकाबले में 21-14, 11-21, 21-19 से हराया। करीब 54 मिनट तक चले इस संघर्षपूर्ण मैच में जीत के साथ ही उन्होंने स्वर्ण पदक की दौड़ में अपनी जगह पक्की कर ली।

इससे पहले तन्वी ने थाईलैंड की कुंगकाएव कनानिक को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। इसके साथ ही वह युवा ओलंपिक बैडमिंटन में अंतिम चार तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी थीं। अब उनके पास फाइनल जीतकर देश के लिए स्वर्ण पदक हासिल करने का मौका है।

खिताबी मुकाबले में तन्वी का सामना चीन की यी शिन झांग से होगा। झांग मौजूदा विश्व जूनियर चैंपियन हैं। दोनों खिलाड़ियों के बीच अब तक एक मुकाबला हुआ है। इस साल एशिया जूनियर चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में तन्वी को झांग के खिलाफ 18-21, 16-21 से हार मिली थी। ऐसे में फाइनल में उनके पास पिछली हार का हिसाब बराबर करने का भी अवसर होगा।

जापानी खिलाड़ी के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबला तन्वी के धैर्य और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता की बड़ी परीक्षा रहा। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और पहला गेम 21-14 से जीत लिया। हालांकि, वतनबे ने दूसरे गेम में वापसी करते हुए 21-11 से बाजी मारी और मुकाबले को तीसरे गेम तक पहुंचा दिया।

निर्णायक गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच हर अंक के लिए कड़ा संघर्ष देखने को मिला। मुकाबला लगातार रोमांचक बना रहा, लेकिन अहम मौकों पर तन्वी ने संयम बनाए रखा। उन्होंने 21-19 से तीसरा गेम अपने नाम कर फाइनल का टिकट हासिल कर लिया।

तन्वी की यह कामयाबी युवा ओलंपिक में भारतीय बैडमिंटन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। इससे पहले 2010 में सिंगापुर में आयोजित पहले युवा ओलंपिक खेलों में एचएस प्रणय ने रजत पदक जीता था। इसके बाद 2018 में ब्यूनस आयर्स में हुए युवा ओलंपिक में लक्ष्य सेन उपविजेता रहे थे। वहीं, आदित्य जोशी ने 2014 में पुरुष एकल स्पर्धा के सेमीफाइनल तक पहुंचकर अपनी छाप छोड़ी थी।

अब सभी की निगाहें तन्वी पत्री पर होंगी, जो फाइनल में जीत दर्ज कर युवा ओलंपिक में भारतीय बैडमिंटन के लिए एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकती हैं।

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