Hockey: हॉकी के मैदान पर दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी की कोई भूमिका नहीं थी, लेकिन वागेनर स्टेडियम में उनके मशहूर नंबर 10 को नजरअंदाज करना नामुमकिन था। जब अर्जेंटीना ने न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना पूल कैंपेन खत्म किया, तो उनके प्रशंसक ने स्टैंड्स को ब्यूनस आयर्स के एक छोटे से हिस्से जैसा बना दिया, वे जोर-जोर से “वामोस, वामोस अर्जेंटीना” के नारे लगा रहे थे और गर्व के साथ मशहूर नीली-सफेद धारियों वाले झंडे दिखा रहे थे।
कई प्रशंसकों ने ने मेसी की मशहूर नंबर 10 वाली फुटबॉल जर्सी पहनी हुई थी। इनमें जुआन क्रूज और लियो भी शामिल थे, जो ब्यूनस आयर्स से आए थे और न सिर्फ अर्जेंटीना के लिए बल्कि नीदरलैंड्स में रह रहे अपने बच्चों के लिए भी चीयर कर रहे थे। उन्होंने कहा, “मेसी और अर्जेंटीना की फुटबॉल टीम हमारे लिए किसी धर्म से कम नहीं हैं। हम खेलों में विविधता, चाहे वो हॉकी हो, फुटबॉल हो या टेनिस हो, हर रूप के बड़े प्रशंसक हैं। हम चाहते हैं कि हमारी टीम जीते।”
उन्होंने हाल ही में देश भर में यात्रा करते हुए दो हफ्ते बिताए थे, जिसमें उन्होंने दिल्ली, आगरा, हैदराबाद और वाराणसी का दौरा किया। उन्होंने कहा, “हमें भारत से प्यार है।हमें दिल्ली, टुक-टुक और रिक्शा बहुत पसंद हैं” और जब उनसे अर्जेंटीना के हालिया फुटबॉल विश्वकप फाइनल के बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब बिल्कुल अर्जेंटीना के लोगों जैसा था।
उन्होंने हंसते हुए कहा, “हम फीफा फाइनल हारे नहीं, बल्कि हमने दूसरा स्थान हासिल किया।” अर्जेंटीना के हॉकी खिलाड़ी भी फुटबॉल टीम के इस जज्बे से प्रेरणा लेते हैं। 2016 रियो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली अर्जेंटीना टीम के सदस्य कैप्टन मटियास रे ने कहा कि मेसी की अगुआई में देश को फुटबॉल में मिली कामयाबी ने खेल की एक आसान सी सोच को और मजबूत किया है कि कभी हार न मानना।
“अर्जेंटीना एक फुटबॉल देश है और उन्होंने इस साल विश्वकप फाइनल खेला। हम उनसे सीखते हैं कि आख़िर तक हार न मानें और लड़ते रहें।” अपने छठे विश्वकप में ये अनुभवी डिफेंडर खुद को वैसी ही भूमिका में देखता है जैसी भूमिका अर्जेंटीना के लिए मेसी निभाते हैं- यानी अपने अनुभव का इस्तेमाल करके युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन करना।
उन्होंने कहा, “मैं लियोनेल मेसी की तरह अपना छठा विश्वकप खेल रहा हूं और मैं ऐसी स्थिति में हूं कि युवा खिलाड़ियों के साथ अपना अनुभव और जो कुछ भी मैंने सीखा है, उसे साझा कर सकूं।” अगले दौर में जब अर्जेंटीना का सामना भारत से होगा, तो रे के अनुभव की फिर से परीक्षा होगी। उन्होंने आगे कहा, “भारत सच में एक मजबूत टीम है। उनके पास कई अच्छे खिलाड़ी और एक अच्छा कोच है, इसलिए मुकाबला कड़ा होगा। हम यहां मुकाबला करने आए हैं। अब हमें दो बेहतरीन टीमों का सामना करना है। हमें पता है कि ये आसान नहीं होगा, लेकिन हम तैयार हैं।”
गोलकीपर टॉमस सैंटियागो, जिन्होंने 57 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं और अर्जेंटीना के पिछले दो विश्वकप में हिस्सा लिया है, जानते हैं कि खतरा कहां है। उन्होंने कहा, “भारत बहुत मजबूत टीम है और उन्हें हराने के लिए हमें 120 फीसदी फोकस रहने की जरूरत है।” सैंटियागो ने हरमनप्रीत सिंह के पेनल्टी-कॉर्नर से होने वाले खतरे का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, “हर टीम के पास एक मजबूत ड्रैग फ्लिकर होता है और हरमनप्रीत भी उनमें से एक हैं। हम वीडियो का विश्लेषण करेंगे और उनके पेनल्टी-कॉर्नर को बेअसर करने की पूरी कोशिश करेंगे।” अर्जेंटीना के हॉकी खिलाड़ी भी वैसी ही निरंतरता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसने उनकी फुटबॉल टीम को दुनिया की एक बड़ी ताकत बना दिया है। सैंटियागो ने कहा, “हम अपनी फुटबॉल टीम की तरह ही सफल होना चाहते हैं। उन्होंने पिछला विश्वकप जीता था और फिर से फाइनल में पहुंचे। हम हर मैच के हिसाब से योजना बनाने की कोशिश करते हैं।”