Haryana: ट्रैक पर मजेदार आउटिंग से लेकर विश्व रिकॉर्ड तक, 10 साल की आर्शी का शानदार कार्टिंग सफर

Haryana:  हरियाणा के फरीदाबाद में रहने वाली आर्शी गुप्ता कभी एक कार्टिंग ट्रैक पर मजे करने गई थीं। उनका सफर अब रिकॉर्डतोड़ बन गया है। उन्होंने FMSCI RMC इंडियन नेशनल कार्टिंग चैंपियनशिप में ‘मिनी मैक्स’ कैटेगरी जीतकर अपना 10वां जन्मदिन मनाया। आर्शी ‘रोटैक्स मैक्स चैलेंज मिनी’ खिताब जीतने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की ड्राइवर बन गईं। इससे पहले 2025 में उन्होंने ‘माइक्रो मैक्स’ का खिताब भी जीता था। इस तरह, वो लगातार दो साल में ‘रोटैक्स मैक्स चैलेंज’ की दो अलग-अलग कैटेगरी जीतने वाली चुनिंदा ड्राइवरों में शामिल हो गईं।

राउंड 5 की फाइनल रेस में उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने लगातार आठ सबसे तेज लैप पूरे किए और ट्रैक रिकॉर्ड तोड़ दिया। उनकी टीम के अनुसार, एक ऐसे खेल में जहां लड़के और लड़कियां बराबरी से मुकाबला करते हैं, आर्शी एशिया की इकलौती महिला नेशनल कार्टिंग चैंपियन हैं। उनके इस सफर की शुरुआत किसी बड़े लक्ष्य या किसी रेसिंग आदर्श (आइडल) को मानकर नहीं हुई थी। आर्शी ने बताया, “मेरा कोई रोल मॉडल नहीं था। मैंने बस मजे के लिए कार्टिंग ट्रैक पर जाना शुरू किया था। मुझे ये पसंद आया और मैं आगे बढ़ती गई।”

अब उनकी नजरें पुर्तगाल के पोर्टिमाओ में होने वाले ‘वर्ल्ड फाइनल्स’ पर हैं। वहां वे दुनिया भर के विजेताओं और फाइनलिस्टों के खिलाफ भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उन्होंने कहा, “मैं हर साल चैंपियनशिप जीतना चाहती हूं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीत हासिल करना चाहती हूं। वर्ल्ड फाइनल्स में हिस्सा लेना चाहती हूं और भारत को गौरवान्वित करना चाहती हूं।” भारत में उनके कोच, रोहित खन्ना ने उन्हें पहली बार गुरुग्राम के एक कार्टिंग ट्रैक पर देखा था। उस समय वे साढ़े छह साल की थीं। शुरुआती होने के बावजूद, कार्ट पर उनका कंट्रोल और मोड़ों पर गाड़ी चलाने की उनकी क्षमता सबसे अलग थी।

रोहित खन्ना ने बताया, “शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि मुझे उन्हें कोई बात दो बार बतानी पड़ी हो। वे बहुत जल्दी चीजें सीख लेती हैं और तुरंत उन्हें लागू भी कर देती हैं।” उन्होंने एक और भारतीय कार्ट रेसर, अतीका मीर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युवा महिला ड्राइवरों की सफलता से आर्शी को ये भरोसा मिल सकता है कि वे भी बेहतरीन नतीजे दे सकती हैं और देश के लिए सम्मान ला सकती हैं। आर्शी की ट्रेनिंग सिर्फ ट्रैक तक ही सीमित नहीं है। इसमें शारीरिक फिटनेस, सही खान-पान और स्कूल की पढ़ाई भी शामिल है। उन्होंने भारत, संयुक्त अरब अमीरात, इंग्लैंड, श्रीलंका और फ्रांस में 21 अलग-अलग सर्किटों पर रेसिंग का अभ्यास किया है।

इंग्लैंड में उनके कोच, डेविड बेलचैम्बर्स ने उनकी बुद्धिमत्ता और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता को उनका “सीक्रेट वेपन” बताया। उन्होंने कहा कि वे बदलती हुई ट्रैकों, टायरों और रेसिंग की स्थितियों के हिसाब से बहुत जल्दी खुद को ढाल लेती हैं। उन्होंने बताया कि जब वे अधिक शारीरिक मेहनत वाली कार्टिंग क्लास में गईं, तो ये एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने पूरी लगन के साथ अपने फिटनेस रूटीन का पालन किया।

आर्शी दुनिया की सबसे कम उम्र की ऐसी ड्राइवर हैं, जिन्हें F1 एकेडमी के ‘डिस्कवर योर ड्राइव’ प्रोग्राम के लिए चुना गया है। वे अब भी डीपीएस फरीदाबाद में पढ़ाई कर रही हैं। उन्हें पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए पहचाना गया है। उनकी मां, डॉ. दीप्ति गुप्ता ने बताया कि आर्शी रेस में जीतने के दबाव में आने के बजाय, मजे लेने के इरादे से हिस्सा लेती हैं। उन्होंने कहा, “वो हमेशा आनंद लेने के लिए जाती हैं। यहां तक कि नेशनल चैंपियनशिप जीतने के बाद भी, वो हमेशा की तरह शांत रहती हैं।” उन्होंने आगे बताया कि परिवार और स्कूल के सहयोग से आर्शी को रेसिंग और अपनी पढ़ाई के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिली है।

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