Akshaya Tritiya: अक्षय तृतीया का पावन पर्व 19 अप्रैल यानी कल रविवार को बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा. वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है क्योंकि इस दिन किए गए किसी भी काम का फल कभी समाप्त नहीं होता.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस पावन तिथि को ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती. इस वर्ष पूजा का सबसे उत्तम समय सुबह से ही आरंभ हो जाएगा, जो साधकों को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करेगा. यह पावन पर्व हमें सिखाती है कि यदि हम सही समय पर और पवित्र मन से ईश्वर की शरण में जाते हैं, तो हमारे जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं.
पूजा का सबसे शुभ समय: सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक
तृतीया तिथि का आरंभ: 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे से
तृतीया तिथि का समापन: 20 अप्रैल 2026, सुबह 07:27 बजे तक
सावधानी और सात्विक आराधना-
शुभ मुहूर्त के दौरान पूजा करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, जिससे पूजा का पूरा फल मिल सके. इस समय घर में किसी भी तरह की अशांति न होने दें और मन में केवल अच्छे विचारों को ही आने दें. पूजा की सामग्री पहले से ही तैयार कर लें ताकि मुख्य मुहूर्त में आपका ध्यान केवल भगवान के नाम का जाप करने में रहे. ताजे पीले फूलों और शुद्ध घी के दीपक का उपयोग करना इस दिन बहुत शुभ माना जाता है. अपनी मधुर वाणी से सबका सम्मान करें और कड़वी बातों से पूरी तरह दूर रहें, जिससे घर की शांति बनी रहे. जब हम पवित्रता और संयम के साथ इन नियमों का पालन करते हैं, तो हमारे जीवन में सुख-शांति का स्थाई वास होता है.