USA: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर और मजबूत बनाए रखने के लिए सप्लाई चेन की सुरक्षा को बेहद अहम बताया है। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में आपूर्ति श्रृंखलाओं को किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भर रखने के बजाय उनका विस्तार और विविधीकरण करना जरूरी है।
अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए जोखिम कम करने के साथ बेहतर कनेक्टिविटी पर भी ध्यान देना होगा। महामारी, युद्ध, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी घटनाएं और अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियां वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में हुई इस बैठक में उठाए गए मुद्दों को साझा करते हुए जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट भी किया। उन्होंने कहा कि देशों को औद्योगीकरण के अपने अधिकारों को आगे बढ़ाना चाहिए। साथ ही, अनुचित व्यापारिक गतिविधियों और प्रतिस्पर्धा को बाधित करने वाली कोशिशों का विरोध किया जाना चाहिए।
विदेश मंत्री के मुताबिक, वैश्विक उत्पादन को अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में विस्तार देने से किसी एक स्थान पर निर्भरता कम होगी। इससे वित्तीय संसाधनों, कच्चे माल, उत्पादन और बाजारों को दबाव बनाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की संभावनाएं भी घटेंगी।
जयशंकर ने जी20 देशों से बाजारों को राजनीतिक प्रभाव से दूर रखने की दिशा में काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और विविधतापूर्ण सप्लाई चेन विकसित करने के लिए सदस्य देशों को अपने राष्ट्रीय हितों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना चाहिए। इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था में सभी देशों की समान भागीदारी और साझा विकास को बढ़ावा देना होना चाहिए।
वहीं, दो दिवसीय बैठक के समापन पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों के सामने यह स्पष्ट किया है कि आर्थिक प्रगति के लिए सप्लाई चेन का सुरक्षित और भरोसेमंद होना बेहद जरूरी है।
रुबियो ने विशेष रूप से होर्मुज और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन रास्तों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला और सुरक्षित रखना आवश्यक है। इसके साथ ही भविष्य की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूत और विस्तारित करना होगा।