SIR: सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं द्वारा दायर याचिका पर भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। याचिका में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) की प्रक्रिया और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है।
कोर्ट ने निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी से याचिका पर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने SIR की प्रक्रिया को चुनौती देने वाले 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर भी कड़ी आपत्ति जताई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने नोटिस जारी करते हुए कहा, “हम अगली सुनवाई की तारीख पर याचिकाकर्ताओं में से एक से उसके आचरण के बारे में पूछना चाहेंगे।”
इससे पहले 12 अक्टूबर को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसले लेने के निर्वाचन आयोग के तरीके को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत समेत अन्य विपक्षी नेता शामिल हैं।
याचिका को W.P.(C) No. 001351/2026 के रूप में दर्ज किया गया है। इसे 12 अक्टूबर को दाखिल किया गया था और शुरुआती प्रक्रियागत कमियों को दूर किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 13 अक्टूबर को पंजीकृत किया। याचिका में इस बात की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है कि निर्वाचन आयोग ने SIR से संबंधित फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, निर्वाचन आयोग को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून और टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप लिए हैं या नहीं।
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना पूर्व सूचना और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए मतदाता सूची से नहीं हटाया जाए। इसके अलावा याचिका में मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बूथवार सूची प्रकाशित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसमें नाम हटाने के कारणों और संबंधित मतदाताओं के जनसांख्यिकीय विवरण को भी सार्वजनिक करने की मांग शामिल है।