Gyanesh Kumar: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) जो स्कूल सुविधाओं और आदिवासी शिक्षा जैसे मुद्दों पर अभियान चला रही है, ने बुधवार को कहा कि अगर लोगों के मताधिकार से समझौता किया गया तो ऐसी कोशिशों से कोई बदलाव नहीं आएगा। पार्टी ने कहा कि चुनाव की सुरक्षा ही देश की दूसरी समस्याओं को हल करने की कुंजी है।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने संकेत दिया कि संगठन चुनाव आयोग में सुधार का मुद्दा उठाएगा। ये बात तब सामने आई जब बुधवार को चुनाव आयोग के अंदर मतभेद खुलकर सामने आ गए। दो चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) पर बार-बार असहमति जताई थी। दीपके ने एक्स पर कहा, “चुनाव आयोग ठीक करो! कल दिल्ली में जरूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस है। ज्ञानेश, हो गया भाई।” सीजेपी ने तय अपने कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं और कहा है कि उसका नेतृत्व दोपहर में दिल्ली में “भारत के लोकतंत्र के अपहरण” पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा।
चुनाव आयोग पर “हमारे वोट चुराने” का आरोप लगाते हुए सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, “कुछ भी काम नहीं करेगा, क्योंकि भारत का चुनाव आयोग समझौता कर चुका है।” दास ने कहा कि सीजेपी स्कूल, बेरोजगारी, बुनियादी ढांचे और परीक्षा में गड़बड़ियों पर अपने अभियान जारी रख सकता है, लेकिन अगर लोग वोट देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाते और चुनावों के जरिए व्यवस्था को नहीं बदल पाते, तो आखिरकार इनका कोई खास फायदा नहीं होगा।
दास ने एक वीडियो बयान में कहा, “हम कितने भी ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चला लें, कितने भी ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान चला लें… लेकिन अगर व्यवस्था को बदलने का हमारा अंतिम हथियार – वोट देने का अधिकार – ही हमसे छीन लिया जाए, तो किसी भी चीज से कोई मदद नहीं मिलेगी।” ये बातें तब सामने आईं जब ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने बुधवार को रिपोर्ट दी कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई है। इन आपत्तियों में मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने, और मतदाता सूची के एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के दौरान मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव जैसे मामले शामिल थे।
विपक्ष ने एसआईआर को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाने और उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। दास ने कहा, “बदलाव लाने का मुख्य जरिया चुनाव ही हैं।” उन्होंने आगे कहा कि अगर युवा पीढ़ी और बाकी लोगों से चुनाव “छीन लिए गए”, “तो फिर कुछ भी कैसे बदलेगा?” उन्होंने कहा कि इसीलिए उनका संगठन चुनाव आयोग के कामकाज और वोट देने के अधिकार की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देने की मांग कर रहा है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद, ईसी अधिकारियों ने बताया कि दोनों आयुक्तों ने अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूची को ठीक करने और वोटर डेटाबेस को संभालने के दौरान लिए गए फैसलों पर सवाल उठाए थे। ईसी सूत्रों का कहना है कि भारत के चुनाव आयोग के सभी फैसले, जिनमें एसआईआर भी शामिल है, सर्वसम्मति से और दोनों चुनाव आयुक्तों व मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी से लिए गए हैं।